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Delhi Assembly Elections : झारखंड और महाराष्ट्र के बाद इस बार खास होगा दिल्ली विधानसभा चुनाव

कांग्रेस जहां दिल्ली में अपना प्रभाव बढ़ाने की उम्मीद करती है, वहीं आम आदमी पार्टी को 2015 और 2020 के चुनावी परिणामों को फिर से दोहराने के लिए बहुत संघर्ष करना होगा।

by Anand Mishra
Loksabha Election
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नई दिल्ली : हर चुनाव अपने आप में खास होता है, लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में जो राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिलेगा, वह इस बार को विशेष बना देगा। हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजों ने दिल्ली और देश की राजनीति में हलचल मचा दी है, और इस बार दिल्ली का चुनाव और भी अहम होने वाला है।

हरियाणा चुनाव के नतीजे और दिल्ली का राजनीतिक समीकरण

दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले हरियाणा विधानसभा चुनाव ने देशभर में राजनीतिक समीकरणों को बदल दिया। भले ही 2024 में भाजपा केंद्र में सत्ता में आई और लोकसभा चुनाव में ज्यादा सीटें हासिल की, लेकिन हरियाणा में भाजपा की अप्रत्याशित जीत ने विपक्षी दलों को एक नई उम्मीद दी है। वहीं, आम आदमी पार्टी (आप) को हरियाणा में मिले झटके ने उसके लिए दिल्ली में अपनी साख बचाने की चुनौती बढ़ा दी है।

कांग्रेस और आप दोनों के लिए अब दिल्ली में राजनीति करना और भी मुश्किल होगा। कांग्रेस जहां दिल्ली में अपना प्रभाव बढ़ाने की उम्मीद करती है, वहीं आम आदमी पार्टी को 2015 और 2020 के चुनावी परिणामों को फिर से दोहराने के लिए बहुत संघर्ष करना होगा।

हरियाणा के चुनावी नतीजों का दिल्ली पर प्रभाव

हरियाणा में भाजपा की तगड़ी जीत ने यह स्पष्ट कर दिया कि चुनावी हवा एकदम बदल चुकी है। हरियाणा में कांग्रेस की हार और आप के घटते प्रभाव ने दिल्ली में भाजपा की स्थिति को मजबूत किया है। दिल्ली में भाजपा का मुकाबला अब केवल आप और कांग्रेस से ही नहीं, बल्कि आप की अपनी मुश्किलों से भी होगा।

आप ने दिल्ली में फ्री बिजली और पानी जैसी योजनाओं से अपना जनाधार मजबूत किया था, लेकिन शराब घोटाले में फंसे नेताओं ने पार्टी की ईमादारी पर सवाल उठाए हैं। अरविंद केजरीवाल और उनके नेताओं को जेल की सजा मिलने के बाद पार्टी को अपनी छवि सुधारने की चुनौती है।

दिल्ली में प्रवासियों का बढ़ता प्रभाव


दिल्ली का जनसंख्या गणित भी इस बार के चुनाव को खास बना सकता है। दिल्ली में हर पांचवां मतदाता पूर्वांचल (बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर भारत) का प्रवासी है। इन प्रवासियों के बिना दिल्ली में कोई पार्टी जीत नहीं सकती। आम आदमी पार्टी ने फ्री बिजली, पानी और प्रवासियों को अपनी पार्टी से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कांग्रेस को इस बात का एहसास तब हुआ जब उसने प्रवासियों को नजरअंदाज किया और इस खाली जगह को आम आदमी पार्टी ने भर लिया।

केजरीवाल का संकट: पार्टी की साख और मुख्यमंत्री बनने की चुनौती


अरविंद केजरीवाल, जो दिल्ली के मुख्यमंत्री पद पर फिर से काबिज होने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के कारण इस बार अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल और उनके साथी मनीष सिसोदिया को कोई सरकारी कार्य नहीं करने की शर्त पर जमानत दी है। इसका मतलब है कि भले ही आम आदमी पार्टी दिल्ली चुनाव जीत जाए, लेकिन केजरीवाल को मुख्यमंत्री बनने के लिए कोर्ट से अनुमति प्राप्त करनी होगी।

दिल्ली चुनाव 2025: एक नया मोड़


दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025, दिल्ली की राजनीति में एक नया मोड़ साबित हो सकता है। भाजपा, कांग्रेस, और आम आदमी पार्टी के बीच की इस जंग को न केवल दिल्ली, बल्कि देशभर की राजनीति पर असर डालने वाली घटनाओं के रूप में देखा जाएगा।

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