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Potato Traders : आलू व्यवसायियों की ममता और हेमंत सरकार से गुहार: जल्द खोलें बॉर्डर, आलू की कीमतें बढ़ने का खतरा

आलू लोड वाहनों को रोके जाने से आलू के थोक व्यापारी और उपभोक्ताओं को भारी नुकसान हो रहा है। आलू की आपूर्ति रुकने के कारण हर दिन खुदरा बाजार में आलू की कीमत में 15 से 20 रुपये की वृद्धि हो रही है।

by Rakesh Pandey
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धनबाद: पश्चिम बंगाल सरकार के हालिया फैसले के कारण झारखंड और बिहार के व्यवसायियों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है। मैथन की डिबुडीह चेकपोस्ट पर गुरुवार रात से आलू लोड वाहनों को रोके जाने से आलू की आपूर्ति पूरी तरह से प्रभावित हो गई है। पश्चिम बंगाल से आलू लोड कर के बिहार और झारखंड लाए जा रहे थे, लेकिन अचानक से चेकपोस्ट पर वाहनों को रोकने के कारण आलू के लदे वाहन वहां खड़े हैं और इनकी गुणवत्ता भी खराब हो रही है।

इसके साथ ही, धनबाद के बरवाअड्डा स्थित कृषि बाजार में भी बंगाल से आलू आने का सिलसिला रुक गया है। नतीजतन, कृषि बाजार के थोक व्यवसायी अब आलू की आपूर्ति के लिए उत्तर प्रदेश से आलू मंगवा रहे हैं, जिससे कीमतों में भी भारी वृद्धि हो रही है।

बंगाल सरकार का मौखिक आदेश और व्यापारियों की परेशानियां

व्यवसायियों का आरोप है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने आलू की आपूर्ति को रोकने के लिए कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया है, बल्कि यह सिर्फ एक मौखिक फरमान है। वे यह भी कहते हैं कि डिबुडीह चेकपोस्ट पर वाहनों से अवैध रूप से वसूली की जा रही है। इससे आलू के थोक व्यापारी और उपभोक्ताओं को भारी नुकसान हो रहा है। आलू की आपूर्ति रुकने के कारण हर दिन खुदरा बाजार में आलू की कीमत में 15 से 20 रुपये की वृद्धि हो रही है, जो आम आदमी के लिए एक बड़ा आर्थिक बोझ बन रहा है।

कृषि बाजार के एक थोक व्यवसायी ने कहा कि आलू सब्जी का राजा है, और बिना आलू के किसी भी सब्जी की कल्पना भी नहीं की जा सकती। जबसे बंगाल से आलू की सप्लाई बंद हुई है, हम यूपी से आलू मंगवा रहे हैं, लेकिन यूपी से आने वाले आलू की कीमत बंगाल से आने वाले आलू से कहीं ज्यादा है।

बंगाल से आलू की आपूर्ति पर असर और व्यवसायियों का आक्रोश

वहीं, एक कारोबारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल बॉर्डर से आलू लाने नहीं दिया जा रहा है, और इसके कारण खुदरा बाजार में आलू की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। उन्होंने राज्य सरकार से यह अपील की कि बॉर्डर खोलने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं।

व्यवसायी ने कहा कि झारखंड और बिहार में आलू की मुख्य आपूर्ति बंगाल से होती है। उन्होंने बताया कि बंगाल सरकार द्वारा इस तरह के प्रतिबंध हर छह से तीन महीने में लगाए जाते हैं, जो कागजी नहीं होते, बल्कि ये सिर्फ बॉर्डर पर ही लागू होते हैं, जहां सीमा पर तैनात पुलिसकर्मी पैसे लेकर वाहनों को छोड़ते हैं। कभी 11 हजार रुपये, तो कभी 20 हजार रुपये की वसूली की जाती है। इस पर रोक लगनी चाहिए।

सुप्रीम अपील: सीएम ममता और हेमंत से बातचीत की आवश्यकता

व्यवसायियों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपील की है कि वे इस गंभीर समस्या का समाधान निकालने के लिए तत्काल बातचीत करें। उन्होंने कहा कि अगर बंगाल सरकार और झारखंड सरकार के बीच इस मसले पर संवाद स्थापित किया जाता है, तो समस्या का हल संभव है।

आलू की सप्लाई पर बैन से झारखंड और बिहार के बाजारों पर सीधा असर पड़ रहा है। आलू की बढ़ती कीमतों से न सिर्फ व्यापारियों को नुकसान हो रहा है, बल्कि आम उपभोक्ताओं के लिए भी यह एक बड़ी समस्या बन चुकी है। व्यापारियों का कहना है कि आलू की कीमतों में बढ़ोतरी से खाद्य महंगाई और बढ़ेगी, जो आम आदमी की मुश्किलें और बढ़ा सकती है।

बॉर्डर खोले नहीं तो बढ़ सकती है आलू की कीमत

इस स्थिति को देखते हुए, आलू व्यापारियों का यह कहना है कि अगर जल्दी ही बॉर्डर खोलने का कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो आलू की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है, और व्यापार में और भी ज्यादा असमंजस पैदा हो सकता है। इस मामले में सरकारों के बीच बातचीत बेहद जरूरी है, ताकि एक स्थिर और निष्पक्ष समाधान निकाला जा सके और व्यापारियों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं को भी राहत मिल सके।

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