सेंट्रल डेस्क: बांग्लादेश सरकार ने भारत से पूर्व पीएम शेख हसीना (Sheikh Hasina) को वापस भेजने की मांग की है। यूनुस सरकार ने इसके लिए भारत सरकार को एक पत्र लिखा है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने सोमवार को बताया कि उसने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को ढाका वापस भेजने के लिए भारत को एक राजनयिक संदेश भेजा है।
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार में विदेश मंत्री तौहीद हुसैन ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि‘हमने भारत सरकार को एक राजनयिक संदेश भेजा है, जिसमें कहा गया है कि बांग्लादेश में न्यायिक प्रक्रिया के लिए शेख हसीना को वापस ढाका भेजा जाए।’ गृह मंत्रालय के सलाहकार जहांगीर आलम ने भी कहा है कि उनके कार्यालय ने भारत से अपदस्थ प्रधानमंत्री हसीना के प्रत्यर्पण के लिए विदेश मंत्रालय को एक पत्र भेजा है।
शेख हसीना के खिलाफ जारी हुआ वारंट
गौरतलब है कि ढाका स्थित अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने ‘मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार’ के लिए पूर्व पीएम शेख हसीना और उनकी कैबिनेट में शामिल मंत्रियों, सलाहकारों समेत सैन्य एवं प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। इससे पहले भी बांग्लादेश की कोर्ट ने कई मामलों में शेख हसीना को पेशी के निर्देश दिए हुए हैं। बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद शेख हसीना ने पांच अगस्त को बांग्लादेश छोड़ दिया था। वो उसी समय से भारत में रह रही है।
भारत-बांग्लादेश के बीच है प्रत्यर्पण संधि: जहांगीर आलम
बांग्लादेश गृह मंत्रालय के सलाहकार जहांगीर आलम ने कहा कि अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण के संबंध में भारत के विदेश मंत्रालय को एक पत्र भेजा है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया अभी जारी है। आलम ने यह भी कहा कि ढाका और नई दिल्ली के बीच प्रत्यर्पण संधि पहले से ही मौजूद है और इस संधि के तहत हसीना को बांग्लादेश वापस लाया जा सकता है।
शेख हसीना ने लगाये थे बांग्लादेश सरकार पर आरोप
बता दें कि शेख हसीना छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों के बीच अपना देश छोड़कर भारत आ गई थीं। अगस्त महीने से ही वो भारत में रह रहीं हैं। बीते दिनों उन्होंने बांग्लादेश की सरकार पर तीखा हमला किया था। शेख हसीना के उस बयान से अंतरिम सरकार में खलबली मच गई थी। उन्होंने सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस पर नरसंहार करने और अल्पसंख्यकों की रक्षा करने में विफल रहने का आरोप लगाया था। हसीना ने अपने अमेरिका स्थित बेटे सजीब वाजेद या अवामी लीग के सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से बयान जारी किया था।
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