हैदराबाद: कहते हैं, ‘आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है।’ इस कहावत को चरितार्थ किया है ट्रिपल आईटी हैदराबाद के शोधकर्ताओं ने। जल संकट आज पूरे विश्व के सामने एक गंभीर समस्या बनकर उभरा है। पानी की बर्बादी को रोकने और इसके बचाव के लिए कई देश और संगठन लगातार प्रयास कर रहे हैं। इस दिशा में भारत के हैदराबाद स्थित भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) के शोधकर्ताओं ने एक विशेष डिवाइस का विकास किया है, जो पानी की बर्बादी को रोकने और पानी के उपयोग की सही जानकारी प्रदान करने में सहायक है।

क्या है एनालॉग मीटर रास्पबेरी पाई कैमरा
IIIT हैदराबाद के स्मार्ट सिटी लिविंग लैब के शोधकर्ताओं द्वारा तैयार किए गए इस डिवाइस का नाम है “एनालॉग मीटर रास्पबेरी पाई कैमरा”। यह डिवाइस रियल-टाइम डेटा प्रदान करता है, जिससे पानी की खपत पर नजर रखना और उसे नियंत्रित करना आसान हो जाता है। यह डिवाइस मीटर की रीडिंग को कैमरे के जरिए कैप्चर करता है और वाई-फाई का इस्तेमाल करके उसे सर्वर पर भेज देता है।
आपने कितना पानी इस्तेमाल किया, बताएगा डिवाइस
इससे न केवल पानी की खपत का रिकॉर्ड मिलता है, बल्कि यह यूज़र्स को यह जानकारी भी देता है कि उन्होंने कितना पानी इस्तेमाल किया है। इसके द्वारा मिले डेटा की मदद से लोग अपने पानी के उपयोग को ट्रैक कर सकते हैं और बेवजह पानी की बर्बादी से बच सकते हैं। डिवाइस यह जानकारी किलोलीटर (KL) में प्रदान करता है, ताकि उपयोगकर्ता अपनी खपत को बेहतर तरीके से समझ सकें और उस पर नियंत्रण पा सकें।
कैसे काम करता है यह डिवाइस?
यह डिवाइस विशेष रूप से पानी के मीटर की रीडिंग को रियल-टाइम में ट्रैक करता है। एक कैमरा, जो मीटर की रीडिंग को कैप्चर करता है, वाई-फाई नेटवर्क के माध्यम से डेटा को सर्वर पर भेजता है। इसके अलावा, इस डिवाइस में एक सेंसर भी लगा है, जो पानी के टैंक में पानी के स्तर को मॉनिटर करता है। यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी तरह की अनावश्यक पानी की बर्बादी को रोका जा सके और उपयोगकर्ता को पानी की वास्तविक स्थिति के बारे में समय पर जानकारी मिल सके।
डिवाइस की कीमत और इसका संभावित लाभ
इस डिवाइस की कीमत लगभग 5,000 रुपये रखी गई है। हालांकि, अगर इसे बड़े पैमाने पर उत्पादित किया जाए, तो इसकी कीमत में कमी आ सकती है। स्मार्ट सिटी लिविंग लैब की चीफ आर्किटेक्ट वी अनुप्रदा ने बताया कि उनकी टीम ने इस डिवाइस को तैयार करने में दो साल की कड़ी मेहनत की है। यह डिवाइस न केवल पानी की बर्बादी को रोकने में सहायक है, बल्कि यह पानी के स्तर को भी ट्रैक करता है, जिससे पानी की उपलब्धता और उपयोग पर बेहतर नियंत्रण रखा जा सकता है।
IIIT हैदराबाद के कैंपस से शुरू हुआ था यह प्रोजेक्ट
इस डिवाइस के निर्माण के पीछे एक खास समस्या थी, जो IIIT हैदराबाद के कैंपस में मौजूद पानी के मीटर से संबंधित थी। संस्थान के कुओं में लगाए गए मीटर को हर महीने मैन्युअल रूप से पढ़ना पड़ता था। अगर मीटर खराब हो जाता था, तो अगली बार चेक किए जाने तक सही रीडिंग नहीं मिल पाती थी, जिससे पानी की बर्बादी और गलत रीडिंग की संभावना रहती थी। इसी समस्या के समाधान के लिए इस डिवाइस का विकास किया गया।

