सेंट्रल डेस्क : योग गुरु बाबा रामदेव ने हाल ही में एक वायरल वीडियो में ‘शरबत जिहाद’ शब्द का उपयोग करके नया विवाद खड़ा किया है। इस वीडियो में उन्होंने दावा किया कि एक शरबत बनाने वाली कंपनी अपनी आय का उपयोग मस्जिदों और मदरसों के निर्माण में कर रही है, जबकि पतंजलि का गुलाब शरबत गुरुकुल, आचार्यकुलम, पतंजलि विश्वविद्यालय और भारतीय शिक्षा बोर्ड की स्थापना में सहायता करता है।

शरबत बेचकर मदरसों का निर्माण
वीडियो में रामदेव कहते हैं, ‘गर्मी में प्यास बुझाने के नाम पर लोग शीतल पेय पदार्थ पीते हैं, जो असल में टॉयलेट क्लीनर जैसे होते हैं। एक ओर टॉयलेट क्लीनर जैसा जहर है, दूसरी ओर एक कंपनी है जो शरबत बेचती है और उससे मिली आय से मस्जिदों और मदरसों का निर्माण करती है। यह उनकी धार्मिक मान्यता है’। इसके बाद वे इसे शरबत जिहाद करार देते हैं, जिसे ‘लव जिहाद’ और ‘वोट जिहाद’ की तरह एक खतरा बताते हैं।
यह वीडियो पतंजलि प्रोडक्ट्स के फेसबुक पेज पर साझा किया गया था, जिसमें उपभोक्ताओं से आग्रह किया गया था कि वे केवल पतंजलि के शरबत और जूस खरीदें, अन्यथा वे शरबत जिहाद का हिस्सा बन सकते हैं। सोशल मीडिया पर इस टिप्पणी को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं आई हैं। कुछ उपयोगकर्ताओं ने रामदेव की टिप्पणी पर आलोचना की है, जबकि अन्य ने इसे उनके व्यवसायिक हितों से जोड़कर देखा है।
हर बार रामदेव बाबा देते हैं विवादित बयान
यह पहली बार नहीं है जब बाबा रामदेव विवादों में घिरे हैं। 2022 में, सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन सहित अन्य संगठनों के आरोप पर उन्हें पतंजलि उत्पादों के माध्यम से गंभीर बीमारियों के इलाज के संबंध में झूठे दावे करने के लिए माफी मांगने का निर्देश दिया था।
इसके अलावा, 2015 में तमिलनाडु के मुस्लिम संगठन तौहीद जमात ने पतंजलि उत्पादों में गौमूत्र के उपयोग को लेकर फतवा जारी किया था, क्योंकि इस्लाम में गौमूत्र का उपयोग बयाननिषिद्ध (हराम) माना जाता है।
बाबा रामदेव की हालिया टिप्पणी और उनके उत्पादों से संबंधित पूर्व विवादों ने उन्हें सार्वजनिक बहस और मीडिया का केंद्र बना दिया है, जो उनके समर्थकों और आलोचकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

