- बिना सीमेंट-सरिया के पत्थरों से होगा निर्माण, तेलंगाना से पहुंचे विशेषज्ञ
बांका (बिहार) : ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से प्रसिद्ध मंदार पर्वत की चोटी पर अब भव्य मंदारेश्वर काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण होने जा रहा है। यह मंदिर पूरी तरह से दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला के अनुसार बनाया जाएगा और विशेष बात यह है कि इसमें सीमेंट और सरिया का प्रयोग नहीं किया जाएगा। मंदिर का निर्माण केवल पत्थरों से किया जाएगा, जैसा कि प्राचीन भारतीय मंदिरों में होता था।

तेलंगाना से आए विशेषज्ञ, शुरू होगा निर्माण कार्य
मंदारेश्वर मंदिर निर्माण के लिए आंध्र प्रदेश के अनुभवी शिल्पकार एम. वेंकटरमना की संस्था मल्लिकार्जुन स्वामी शिल्पी वर्क्स को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनके नेतृत्व में करीब दो दर्जन से अधिक शिल्पकार 18 अप्रैल को राजमुंदरी से मंदार पर्वत पहुंचेंगे। मंदिर निर्माण कार्य अगले सप्ताह से शुरू किया जाएगा और इसे छह महीने में पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
मंदिर निर्माण की प्रमुख विशेषताएं
सीमेंट-सरिया का उपयोग नहीं होगा:
मंदारेश्वर काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण पूरी तरह पत्थरों से किया जाएगा। आधुनिक सामग्रियों की जगह पारंपरिक शिल्पकला और स्थापत्य तकनीक का उपयोग होगा।
दक्षिण भारतीय मंदिर शैली में निर्माण
यह मंदिर बालाजी तिरुपति और रामेश्वरम मंदिर की तर्ज पर आगम शास्त्र के अनुसार बनेगा। कलश सहित मंदिर की कुल ऊंचाई 90 फीट होगी।
मूर्ति स्थापना
मंदिर के गोपुरम में शिव परिवार की मूर्तियां लगाई जाएंगी – भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, नंदी और सुब्रमण्यम स्वामी।
गुंबद पर दक्षिणामूर्ति
मंदिर के गुंबद पर चारों दिशाओं में वीरभद्र स्वामी, ध्यान शिवा और नटराज की दक्षिणामूर्ति स्थापित की जाएगी।
दो चरणों में होगा निर्माण कार्य (Mandir Nirman Ke Do Charan)
प्रथम चरण
मंदिर का मुख्य भवन, गर्भगृह और मूर्तियों की स्थापना की जाएगी।
द्वितीय चरण
मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण, कॉरिडोर और पर्वत की घेराबंदी की जाएगी। इस चरण में आने-जाने के मार्ग, दर्शकों के लिए सुविधाएं और स्थापत्य सज्जा शामिल होगी।
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