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भारत के पूर्व PM भी लेते थे ‘Urine Therapy’, कैंसर का है जबरदस्त इलाज

मूत्र थैरेपी का उपयोग मुहांसों, त्वचा की बीमारियों और यहां तक कि कैंसर के इलाज में किया जाता था।

by Reeta Rai Sagar
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फीचर डेस्क : अभिनेता Paresh Rawal ने हाल ही में खुलासा किया कि उन्होंने अपने घुटनों के दर्द के इलाज के लिए मूत्र (यूरिन) पीना शुरू किया था। उनके इस स्टेटमेंट के बाद से इस पर बहस शुरू हो गई है। डॉक्टर से लेकर आम आदमी तक इस पर सवाल कर रहे हैं। एक्टर परेश रावल ने एक इंटरव्यू में बताया, ‘मैंने 15 दिनों तक मूत्र पया। 15 दिनों के बाद डॉक्टर ने जब मेरा एक्स-रे किया तो वह हैरान रह गए। डॉक्टर ने पूछा, ‘कैसे यह सीमेंटिंग हुई?’ उन्होंने सफ़ेद रेखा के गठन को देखा। मुझे 2-2.5 महीने में छुट्टी मिलनी थी, लेकिन मुझे 1.5 महीने में छुट्टी मिल गई। यह जादू जैसा था’।

प्राचीन रोम-यूनान में इलाज के लिए होता था प्रयोग

इससे पहले देश के पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के संबंध में भी ऐसी बातें कही गई है कि वे स्वास्थ्य कारणों से यूरिन थेरेपी लेते थे। यूरिन थेरेपी, जिसे युरोपैथी या यूरोथेरेपी के नाम से भी जाना जाता है, का प्रयोग प्राचीन रोम, यूनान और मिस्र में विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता रहा है। ऐतिहासिक रिपोर्ट के अनुसार, मूत्र थैरेपी का उपयोग मुहांसों, त्वचा की बीमारियों और यहां तक कि कैंसर के इलाज में किया जाता था। कुछ प्राचीन चिकित्सकीय परीक्षणों में डायबिटीज़ का पता लगाने के लिए मूत्र का स्वाद लेकर भी जांच की जाती थी।

यूरिन थेरेपी सेवन से जुड़े खतरे

हालांकि कुछ लोग मूत्र थैरेपी के लाभों पर जोर देते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह चेतावनी देते हैं कि मूत्र पीने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मूत्र में मौजूद कचरे और विषाक्त पदार्थ, जिन्हें आपके शरीर से फिल्टर किया जाता है, का नियमित सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। हाल के अध्ययनों से यह पता चला है कि मूत्र में कुछ हानिकारक बैक्टीरिया भी मौजूद होते हैं, जिन्हें निगलने या घाव के माध्यम से शरीर में प्रवेश करने से संक्रमण की समस्या हो सकती है।

पेशाब पीने के स्वास्थ्य जोखिम : जानिए पूरी सच्चाई

स्वस्थ रहने के लिए स्वच्छ पेयजल का सेवन अत्यंत आवश्यक है, लेकिन कई बार पेशाब पीने से जुड़ी भ्रांतियां लोगों के बीच फैलती रही हैं। वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर, पेशाब पीने के स्वास्थ्य जोखिमों को समझना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं इससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी…

पेशाब पीने से बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा

हालांकि खुद का पेशाब (स्वमूत्र) पीने से ऐसी बीमारी फैलने की संभावना कम है जो पहले से शरीर में न हो, फिर भी पेशाब में मौजूद रोगाणु या मूत्रमार्ग की परत से आने वाले बैक्टीरिया स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं। किसी अन्य व्यक्ति का पेशाब पीने से संक्रमण फैलने की संभावना और अधिक बढ़ जाती है।

पेशाब में उच्च खनिज तत्व और उनके प्रभाव

पेशाब शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने की प्रक्रिया का हिस्सा है। इसमें यूरिया, सोडियम, पोटेशियम और क्रिएटिनिन जैसे खनिज अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। यदि शरीर में पर्याप्त पानी मौजूद न हो तो इन खनिजों का पुनः सेवन करने से गुर्दों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

पेशाब के माध्यम से दवाओं और हार्मोन का जोखिम

कुछ दवाओं और उनके उपोत्पादों का उत्सर्जन पेशाब के माध्यम से होता है। यदि किसी दवा का सेवन करने वाले व्यक्ति का पेशाब पीया जाए तो अनजाने में उस दवा का प्रभाव शरीर पर पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त, पेशाब में हार्मोन के अंश भी पाए जाते हैं, जो बिना चिकित्सकीय सलाह के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।

क्या पेशाब वास्तव में जीवाणुरहित होता है

यह एक आम भ्रांति है कि पेशाब पूरी तरह जीवाणुरहित होता है। 1950 के दशक में एडवर्ड कैस द्वारा विकसित बैक्टीरिया परीक्षण के अनुसार, पेशाब में 100,000 कॉलोनी-फॉर्मिंग बैक्टीरिया प्रति मिलीलीटर से कम होना ‘सामान्य’ माना जाता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि पेशाब पूरी तरह जीवाणुरहित है। स्वस्थ व्यक्ति के पेशाब में मौजूद बैक्टीरिया शरीर के अंदर तो नुकसान नहीं पहुंचाते, लेकिन इन्हें पीने पर संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

निर्जलीकरण की स्थिति में पेशाब पीने से बढ़ सकता है खतरा

अत्यधिक प्यास या निर्जलीकरण की स्थिति में पेशाब पीने के बारे में भी कई मिथक प्रचलित हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, निर्जलीकरण के समय पेशाब पीना फायदेमंद नहीं है। पेशाब में उच्च मात्रा में सोडियम और अन्य खनिज पाए जाते हैं, जो समुद्री जल की तरह शरीर में पानी की कमी को और बढ़ा सकते हैं। इसीलिए, जीवित रहने के लिए पेशाब पीने की सलाह नहीं दी जाती।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से स्पष्ट है कि पेशाब पीना स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित नहीं है। इससे संक्रमण का खतरा, गुर्दों पर दबाव और दवाओं या हार्मोन के अनजाने प्रभाव का जोखिम बढ़ सकता है। बेहतर स्वास्थ्य के लिए स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल का सेवन ही सर्वोत्तम विकल्प है।

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