नई दिल्ली : जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच उत्पन्न हुए तनाव के दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सोमवार को एक क्लोज-डोर मीटिंग आयोजित की गई। यह बैठक पाकिस्तान के आग्रह पर हुई, लेकिन इसमें कोई ठोस समाधान नहीं निकला और न ही सुरक्षा परिषद की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया। इस डेढ़ घंटे की गोपनीय बैठक में पाकिस्तान की रणनीति विफल होती नजर आई।

UNSC में क्लोज-डोर मीटिंग : पाकिस्तान की रणनीति पर सवाल
यह बैठक ऐसे समय में बुलाई गई जब संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दोनों परमाणु संपन्न देशों के बीच बढ़ते तनाव पर गंभीर चिंता जाहिर की थी। गुटेरेस ने इसे ‘वर्षों में सबसे अधिक तनावपूर्ण स्थिति’ बताया और कहा कि ‘अब समय है कि दोनों देश संयम बरतें, सैन्य समाधान कोई परिणाम नहीं दे सकता’।
बैठक के बाद पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि असीम इफ्तिखार अहमद ने कहा कि ‘बैठक से हमारे अधिकतर उद्देश्य पूरे हो गए हैं’। हालांकि, सुरक्षा परिषद की ओर से न तो कोई प्रस्ताव पारित किया गया और न ही भारत के खिलाफ कोई बयान जारी किया गया, जिससे पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशें कमजोर पड़ती दिखाई दीं।
भारत के खिलाफ पाकिस्तान की झूठी बयानबाजी
बैठक के दौरान पाकिस्तान ने कई आरोप लगाए। सिंधु जल संधि को भारत द्वारा एकतरफा निलंबित करने को पाकिस्तान ने ‘अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन’ बताया और दावा किया कि इससे क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा है। पाकिस्तान ने यह भी दावा किया कि भारत द्वारा लिए गए कदम जैसे अटारी सीमा बंद करना, राजनयिक संबंधों में कटौती और आतंकवाद के खिलाफ कड़े फैसले, क्षेत्र में अस्थिरता को बढ़ावा दे रहे हैं।
पाकिस्तान ने कश्मीर को एक अंतरराष्ट्रीय विवाद के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की और कहा कि यह ‘क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर जोखिम’ उत्पन्न करता है। हालांकि, भारत ने इन सभी आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया।
भारत की प्रतिक्रिया : ‘कोई ठोस नतीजा नहीं’
भारत के पूर्व स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने पीटीआई को दिए बयान में कहा कि इस बैठक से किसी ठोस नतीजे की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का मकसद सिर्फ ‘धारणाएं गढ़ना’ था, जिसका भारत उचित और सशक्त जवाब देगा।
महासचिव की शांति की अपील
एंटोनियो गुटेरेस ने 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे। इनमें एक नेपाली नागरिक भी शामिल था। उन्होंने दोहराया कि ‘नागरिकों को निशाना बनाना किसी भी हाल में स्वीकार नहीं है’ और जिम्मेदारों को न्याय के कठघरे में लाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को सैन्य टकराव से बचना चाहिए और बातचीत की राह पर लौटना चाहिए।
सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान की आपत्ति
पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने को गंभीरता से उठाया और इसे ‘सीधी आक्रामकता’ करार दिया। उन्होंने कहा कि ‘ये नदियां 24 करोड़ पाकिस्तानियों की ज़रूरतें पूरी करती हैं और इनका प्रवाह बाधित किया जाना, निम्न प्रवाही देश के लिए खतरा है’।
पाकिस्तान ने फिर दोहराया टकराव नहीं चाहता, लेकिन…
हालांकि पाकिस्तान ने यह दावा किया कि वह टकराव नहीं चाहता, परंतु उसने साथ ही यह भी जोड़ा कि यदि ज़रूरत पड़ी तो वह अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए तैयार है, जैसा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 में वर्णित है। इसके अलावा पाकिस्तान ने भारत द्वारा पहलगाम हमले के लिए दोषी ठहराए जाने से इनकार किया।

