रांची : भारत के झारखंड राज्य में एक 200 साल पुराना ऐसा महल मौजूद है, जो हर मानसून में एक ही प्राकृतिक कहर का सामना करता है—आकाशीय बिजली। रांची-पतरातू रोड पर स्थित पिठोरिया गांव में मौजूद राजा जगतपाल सिंह का यह विशाल महल, जो कभी भव्यता और वैभव का प्रतीक था, आज खंडहर में तब्दील हो चुका है।
क्यों गिरती है हर साल बिजली इसी महल पर
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह केवल मौसम का प्रभाव नहीं, बल्कि एक श्राप का नतीजा है। मान्यता है कि 1857 की क्रांति के समय राजा जगतपाल सिंह ने ब्रिटिश सरकार का समर्थन किया और स्वतंत्रता सेनानी ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव को पकड़वाने में मदद की। इसके बदले ठाकुर ने राजा को श्राप दिया कि उनका साम्राज्य खत्म हो जाएगा और उनका प्रिय 100 कमरों वाला महल आकाशीय बिजली से नष्ट हो जाएगा।
श्राप या विज्ञान
मान्यता यह भी है कि ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव ने कहा था कि जब तक यह महल मिट्टी में नहीं मिल जाएगा, तब तक इस पर आसमान से कहर बरसता रहेगा।
वहीं भूवैज्ञानिकों की राय इससे कुछ अलग है। विशेषज्ञों के अनुसार, पिठोरिया क्षेत्र में लौह अयस्क की प्रचुरता है, जो बिजली को आकर्षित करता है। ऊंचे पेड़, पहाड़ और लोहे की मौजूदगी से यह क्षेत्र बिजली के लिए एक सुचालक बन जाता है। इसीलिए बारिश के मौसम में अक्सर आकाशीय बिजली यहीं गिरती है।
महल की ऐतिहासिक भव्यता
करीब 30 एकड़ क्षेत्र में फैला यह महल दो मंजिला था, जिसमें 100 से अधिक कमरे थे। इसमें मुगलकालीन वास्तुकला का सुंदर प्रयोग किया गया था। महल के अंदर रानियों के स्नान के लिए तालाब और भव्य शिव मंदिर भी मौजूद थे। यह महल कभी राजसी वैभव का प्रतीक था, लेकिन अब इसके केवल कुछ अवशेष ही शेष हैं।
स्थानीय लोगों के अनुभव
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि वे हर साल आकाशीय बिजली गिरते देखते हैं और वह हमेशा इसी किले पर गिरती है। बारिश शुरू होते ही लोगों के मन में डर का साया छा जाता है। किसी में इतना साहस नहीं कि वे बारिश में उस किले के पास जाएं।

