

टेराकोटा कला और शिव-मौलिक्षा संगम से समृद्ध है यह प्राचीन गांव

दुमका : झारखंड के दुमका जिले में स्थित मलूटी गांव को यूं ही ‘मंदिरों का गांव’ नहीं कहा जाता। इस गांव की पहचान है यहां मौजूद 108 प्राचीन मंदिर, जिनमें से आज भी 72 मंदिर अपनी ऐतिहासिक और स्थापत्य सुंदरता के साथ खड़े हैं। ये मंदिर सिर्फ पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं हैं, बल्कि टेराकोटा कला और पुरातात्विक वास्तुकला के बेजोड़ उदाहरण हैं।

एक गांव में इतने मंदिर क्यों, जानिए ऐतिहासिक कारण
इतिहासकारों और स्थानीय परंपराओं के अनुसार, मलूटी गांव में इन मंदिरों का निर्माण पलास राजा बाज बसंत राय द्वारा 17वीं शताब्दी में कराया गया था। यह गांव कभी पलास साम्राज्य की राजधानी हुआ करता था। राजा ने अपनी कुलदेवी मां मौलिक्षा की कृपा से प्राप्त सत्ता को स्थायित्व देने के लिए हर राजवंशीय वंशज को एक-एक मंदिर बनाने का आदेश दिया। यही कारण है कि इतने मंदिर एक ही गांव में निर्मित हुए।
इन मंदिरों में अधिकांश मंदिर भगवान शिव को समर्पित हैं, लेकिन यहां मां मौलिक्षा का प्रमुख स्थान है। मां मौलिक्षा को तंत्र विद्या की देवी और शक्ति स्वरूपा माना जाता है। हर साल यहां हजारों श्रद्धालु मौलिक्षा माता के दर्शन और शिव पूजन के लिए पहुंचते हैं।

आस्था का केंद्र बना मलूटी गांव
मलूटी सिर्फ पुरातत्व प्रेमियों या इतिहासकारों के लिए नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र भी है। विशेषकर महाशिवरात्रि और नवरात्रि के अवसर पर यहां भारी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। मान्यता है कि यहां मां मौलिक्षा और भगवान शिव की पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
स्थानीय लोग आज भी इन मंदिरों की सेवा को अपना कर्तव्य मानते हैं। गांव की हर गली, हर रास्ता मंदिरों की ओर जाता है, मानो पूरी बस्ती ही एक जीवंत तीर्थ बन गई हो।
संरक्षण की जरूरत
हालांकि 108 मंदिरों में से 72 मंदिर ही आज संरक्षित अवस्था में हैं, शेष मंदिर धीरे-धीरे जर्जर और उपेक्षित हो चुके हैं। सरकार और पुरातत्व विभाग की कोशिशों से कुछ मंदिरों का संरक्षण हो रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि इस धरोहर को बचाने के लिए समर्पित और दीर्घकालिक प्रयासों की जरूरत है।
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