

नई दिल्ली : देश भर के 700 से अधिक मेडिकल कॉलेजों में छात्रों से अधिक शुल्क वसूली, इंटर्नशिप स्टाइपेंड में देरी, रैगिंग-उत्पीड़न जैसी समस्याओं के समाधान के लिए अब एक नई तीन स्तरीय शिकायत निवारण प्रणाली लागू होगी। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने इस बाबत कड़ा फैसला लेते हुए स्पष्ट किया है कि अगर कोई कॉलेज नियमों का पालन नहीं करता तो उसकी मान्यता रद्द की जा सकती है।

अब तीन स्तरों पर निपटेंगी छात्रों की शिकायतें
एनएमसी के सचिव डॉ. राघव लांगर के अनुसार, मेडिकल कॉलेजों में छात्रों को बार-बार हो रही शिकायतों से राहत दिलाने के लिए यह तंत्र बनाया गया है। अब छात्रों की शिकायतें पहले कॉलेज स्तर पर सुनी जाएंगी। समाधान नहीं होने पर मामला डीएमई (निदेशक चिकित्सा शिक्षा) के पास जाएगा और अंतिम स्तर पर एनएमसी खुद संज्ञान लेकर समाधान करेगी।

NMC Medical Rules : सभी कॉलेज, यूनिवर्सिटी और राज्य शिक्षा विभागों को निर्देश
इस आदेश का तत्काल प्रभाव से पालन सुनिश्चित करने के लिए सभी मेडिकल कॉलेजों, यूनिवर्सिटियों और राज्य शिक्षा विभागों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इससे फीस, स्टाइपेंड, फैकल्टी की कमी और रैगिंग जैसी शिकायतों को तेजी से निपटाने में मदद मिलेगी।

शिकायतों की अनदेखी पर मान्यता रद्द होगी
एनएमसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन कॉलेजों में पारदर्शिता नहीं पाई गई या शिकायतों को नजरअंदाज किया गया, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। मान्यता रद्द करना भी विकल्पों में शामिल है। यह निर्णय मेडिकल शिक्षा संस्थानों में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।
NMC Medical Rules : फैकल्टी और स्टाइपेंड का होगा नियमित ऑडिट
एनएमसी को मिल रही शिकायतों में शुल्क वृद्धि, स्टाइपेंड न मिलना, फैकल्टी की अनुपलब्धता और बुनियादी सुविधाओं की कमी प्रमुख रहीं। अब तीन सदस्यीय निरीक्षण टीम इन पहलुओं का गहराई से मूल्यांकन करेगी। इसके लिए संस्थानों में समय-समय पर निरीक्षण किया जाएगा।
ऑनलाइन पोर्टल से दर्ज होंगी शिकायतें
एनएमसी अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी शिकायत दर्ज करने की सुविधा शुरू करने जा रही है, जिससे छात्र कहीं से भी अपनी बात रख सकें। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
मेडिकल छात्रों को मिलेगा त्वरित न्याय
एनएमसी का यह नया फैसला मेडिकल शिक्षा में सुधार और छात्रों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है। तीन स्तरीय शिकायत निवारण प्रणाली से उम्मीद की जा रही है कि अब छात्रों को न तो भटकना पड़ेगा और न ही सालों तक इंतजार करना पड़ेगा।
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