

नई दिल्ली: बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची की विशेष जांच प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग (ECI) को सुप्रीम कोर्ट से कड़ी फटकार लगी है। शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि हर मतदाता की नागरिकता जांचना निर्वाचन आयोग का कार्य नहीं है, बल्कि यह गृह मंत्रालय का दायित्व है।

Supreme Court News : सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी– “कानूनी दायरे से बाहर जा रहा है आयोग”
सुनवाई के दौरान जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने निर्वाचन आयोग से तीखे सवाल पूछते हुए कहा कि अगर आप हर वोटर की नागरिकता साबित करने बैठेंगे, तो यह एक बहुत बड़ा काम हो जाएगा। यह आपका काम नहीं है। नागरिकता तय करने की अपनी कानूनी प्रक्रिया है, इसमें दखल न दें।

Supreme Court News : याचिकाकर्ताओं और विपक्ष की आपत्ति
याचिकाकर्ताओं और विपक्षी दलों ने निर्वाचन आयोग पर मनमानी और भेदभावपूर्ण रवैये का आरोप लगाया। वकील गोपाल शंकर नारायण ने तर्क दिया कि वर्ष 2003 से पहले मतदाता बनने वालों को केवल फॉर्म भरने की छूट है, जबकि उसके बाद के लोगों से दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। यह प्रक्रिया संविधान और कानून दोनों के खिलाफ है।

आयोग का पक्ष– आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं
निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ वकील के के वेणुगोपाल ने दलील दी कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है, इसलिए हम अन्य दस्तावेज मांग रहे हैं। लेकिन इसी तर्क पर सुप्रीम कोर्ट ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आयोग को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि कोई भारतीय नागरिक है या नहीं।
अब सवालों के घेरे में है आयोग की प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद यह साफ हो गया है कि आयोग की यह “नागरिकता जांच पहल” कानून के दायरे से बाहर जाती है। अब आयोग के लिए अपनी प्रक्रिया को न्यायोचित ठहराना एक बड़ी चुनौती बन गई है। मामले की अगली सुनवाई जल्द निर्धारित होगी।
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