Jamshedpur: गुड़ाबांदा-जियान-धालभूमगढ़ पथ परियोजना में पंचाटियों को भुगतान का मामला अब तूल पकड़ रहा है। न खतियान और ना ही भूमि के मालिकाना का कोई दस्तावेज। फिर भी गुड़ाबांदा के जिला परिषद सदस्य शिवनाथ मांडी जिला भू-अर्जन कार्यालय पर भुगतान का दबाव बना रहे हैं। यह भुगतान है पथ निर्माण विभाग की गुड़ाबांदा-जियान-धालभूमगढ़ पथ परियोजना में भूमि अधिग्रहण का।
दो साल पहले हुए अधिग्रहण के बाद भी दस्तावेज नहीं होने या किसी अन्य वजह से दर्जनों लोगों ने अब तक भुगतान के लिए आवेदन नहीं किया है। जिला परिषद सदस्य ने भी भुगतान के लिए अब तक आवेदन नहीं किया है मगर वह इस मामले को लेकर बराबर शिकायत कर रहे हैं। जिला भू-अर्जन विभाग का कहना है कि जिस भूमि के लिए जिला परिषद सदस्य भुगतान मांग रहे हैं उसका खतियान सायबा मांडी और फागू मांडी के नाम है। इस पर फागू की पत्नी पंसुरी मांडी ने भुगतान का दावा कर दिया है। इसी के चलते इस भुगतान में पेंच फंस गया है।
कइयों के पास रजिस्ट्री नहीं, सादे कागज पर है जमीन का एग्रीमेंट
भुगतान लेट होने के पीछे कारण बताया जा रहा है कि कई पंचाटियों के पास भूमि के दस्तावेज ही नहीं हैं। दस्तावेज किसी अन्य के नाम हैं। सूत्रों की मानें तो कुछ लोग सरकारी या फिर किसी अन्य की जमीन पर कब्जा कर लेते हैं। जब उस भूमि का अधिग्रहण हो जाता है तो उनके पास संबंधित जमीनों के कागजात नहीं होते। लेकिन, भू-अर्जन विभाग के नियमों के अनुसार अगर किसी को अपनी भूमि के लिए मुआवजा चाहिए तो उसे जमीन के कागजात लगा कर आवेदन करना पड़ता है।
यहीं, पेच फंस जाता है। कई लोग फर्जी या गलत कागजात लगा कर आवेदन कर देते हैं। मगर, जब उसी जमीन पर दूसरों का दावा हो जाता है तो मामला सुनवाई में चला जाता है। यही वजह है कि कई लोगों ने इस परियोजना के लिए अब तक आवेदन ही नहीं किया है। जिला परिषद सदस्य के मामले में भी यही है। जिला भू-अर्जन विभाग का कहना है कि जिला परिषद जिस जमीन का भुगतान मांग रहे हैं, उस पर किसी अन्य ने दावा कर रखा है।
इसलिए इस जमीन का भुगतान अब तक नहीं हो पाया है। इस परियोजना के कई पंचाटियों के पास उनकी जमीन के मालिकाना हक को साबित करने के लिए रजिस्ट्री तक नहीं है। इनके पास सिर्फ एग्रीमेंट है वह भी सादे कागज पर। इस तरह के एग्रीमेंट मालिकाना के लिए मान्य नहीं होते।
अंचल को सत्यापन के लिए भेजे गए हैं 54 दस्तावेज
कुछ दस्तावेजों पर भू अर्जन विभाग को शक है। इसलिए इन कागजातों को अंचल कार्यालय में सत्यापन के लिए भेजा गया है। जिला भू-अर्जन कार्यालय ने 54 मामलों के दस्तावेज अंचल कार्यालय भेजे हैं। बकराकोचा गांव में 101 पंचाटी हैं। इनमें से किसी भी पंचाटी ने अब तक मुआवजे के लिए आवेदन नहीं किया है। दो साल पहले गुड़ाबांदा के भालकी में कैंप लगाया गया था। यहां के 242 पंचाटियों को अधिग्रहण का भुगतान मिलना है। मगर, इनमें से 83 पंचाटियों ने ही भुगतान के लिए आवेदन दिया है । इनमें से अब तक 76 लोगों को दो करोड़ रुपये का ही भुगतान हो पाया है।
इनमें से 29 ऐसे मामले हैं जिनमें विवाद के चलते सुनवाई चल रही है। सुनवाई में जिनके पक्ष में फैसला होगा। उनको भुगतान किया जाएगा। 159 पंचाटी एसे हैं जिन्होंने भुगतान के लिए आवेदन ही नहीं दिया है। आशंका जताई जा रही है कि इन पंचाटियों के पास दस्तावेज की कमी होगी। इसीलिए यह लोग आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। इस परियोजना के लिए स्वर्गछिड़ा में 28 पंचाटियों को भूमि अधिग्रहण के एवज में मुआवजा दिया जाना था। इसमें से 26 पंचाटियों ने आवेदन दिया और उन्हें भुगतान कर दिया गया है।
जिन लोगों ने सही दस्तावेज के साथ आवेदन किया था, उन्हें भुगतान कर दिया गया है। कई लोगों के पास दस्तावेज नहीं हैं। कुछ लोग दूसरों के जमीन पर दावा कर रहे हैं। कुछ लोगों ने गलत दस्तावेज लगाए हैं। इन सब मामले में सुनवाई चल रही है। अंचल कार्यालय से दस्तावेजों का सत्यापन कराया जा रहा है।
- गुंजन कुमारी सिन्हा, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी

