- नम आंखों के साथ गोद में पांच दिन के बच्चे को लेकर ऑफिस पहुंची मृतक जीत की पत्नी
- पुलिस पर लगाया तथ्यों को तोड़ने-मरोड़ने का आरोप, पीड़ित परिवार को किया जा रहा परेशान
Jamshedpur : एमजीएम थाना पुलिस की हिरासत में गोकुल नगर के युवक जीत महतो की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सोमवार को जीत महतो की बुआ एसएसपी ऑफिस पहुंची और मामले की जांच के बाद दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई की मांग की। जीत महतो की बुआ का कहना है कि कुछ लोग जीत के घर पहुंच कर उसकी मां और पिता को धमकी दे रहे हैं। दोनों से कह रहे हैं कि थाने चलो। जब इस बारे में थाने में बात की गई तो कहा गया कि वह पुलिस कर्मी नहीं हैं। जीत की बुआ का कहना है कि अगर वह पुलिस कर्मी नहीं हैं तो फिर कौन हैं। किसकी इतनी हिम्मत हो गई है कि वह जीत के घर जाकर उसके माता-पिता को थाने चलने की बात कर रहा है। अगर वह पुलिस कर्मी नहीं है तो थाने में क्यों बुलाया जा रहा है।

जीत की बुआ का कहना है कि जीत कोई अपराधी नहीं था। उसे नहीं पता था कि फोन चोरी का है। चोरी का फोन खरीदने की इतनी बड़ी सजा उसे चुकानी पड़ी। जीत की पत्नी अपनी गोद में जीत के उस बच्चे को लेकर एसएसपी ऑफिस पहुंची थी जो उसी 31 दिसंबर को पैदा हुआ जिस दिन जीत एमजीएम अस्पताल में भी इमरजेंसी के बेड पर लाश बन कर लेटा था। एमजीएम अस्पताल में ही ऊपर लेबर रूम में पत्नी की डिलिवरी हो रही थी और नीचे इमरजेंसी में जीत का शव पड़ा था।
गौरतलब है कि परिजनों के अनुसार एमजीएम थाना पुलिस ने 28 दिसंबर रविवार को रात एक बजे गोकुल नगर के युवक जीत महतो को उठाया था। जबकि, पुलिस यह समय रात तीन बजे बता रही है। जीत महतो पर चोरी का मोबाइल 500 रुपये में खरीदने का आरोप था। परिजनों का कहना है कि जब पुलिस जीत को लेकर जा रही थी तब भी वह गंभीर रूप से बीमार था। उसका इलाज चल रहा था। जीत के माता-पिता ने पुलिस कर्मियों के सामने गिड़गिड़ा कर रहा था कि उसे छोड़ दिया जाए। मगर, पुलिस कर्मियों ने जीत को नहीं छोड़ा था। वह उसे थाने लेकर आए थे।
अब पुलिस का कहना है कि सोमवार को जब पुलिस को परिजनों से पता चला कि जीत महतो की तबीयत ज्यादा खराब है। परिवार के लोगों ने ही 28 दिसंबर को जीत का ब्लड टेस्ट कराया था। सैंपल लेकर रांची भेजा गया था। डाक्टर रवि खत्री उसका इलाज कर रहे थे। पुलिस का कहना है कि इसके बाद जीत महतो को पीआर बांड पर छोड़ दिया गया। पीआर बांड बना कर पुलिस ने कागज पर जीत महतो को सुशेन महतो, पूजा महतो और मंगल लोहरा के सुपुर्द किया। इसके बाद जीत महतो को 29 दिसंबर को ही एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया।
जबकि, परिजनों का कहना है कि जब जीत की मां थाने पहुंचीं तो उन्हें बताया गया कि उनका बेटा एमजीएम में भर्ती किया गया है। इसके बाद जब जीत की मां एमजीएम असपताल पहुंचीं तो पता चला कि उनके बेटे की मौत हो चुकी है। अब सवाल यह है कि सुशेन महतो, पूजा महतो और मंगल लोहरा कौन हैं। पुलिस ने उनके माता-पिता, पत्नी या बुआ को थाने पर बुला कर जीत महतो को उनके सुपुर्द पीआर बांड पर क्यों नहीं छोड़ा।
पुलिस के अनुसार जीत को जब भर्ती कराया गया था तभी परिजनों को इसकी जानकारी हो गई थी। पुलिस के अनुसार जीत की मौत अस्पताल में इलाज के दौरान 31 दिसंबर को हुई है। जबकि, परिजनों का कहना है कि उन्हें जब जीत के अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी मिली तो वह फौरन अस्पताल पहुंचे और वहां जीत की लाश मिली। परिजनों के बयान पर गौर करें तो पता चलता है कि उन्हें यह नहीं पता था कि जीत को पुलिस ने अस्पताल में भर्ती कराया है।
अब सवाल इस बात का है कि पुलिस ने जीत को एमजीएम अस्पताल में किस दिन और किस समय भर्ती कराया। यही नहीं, जीत की मौत किस दिन और किस समय हुई। पुलिस ने जीत महतो का जो पीआर बांड भरा और उसे जिसके सुपुर्द किया वह कौन लोग हैं। जांच के प्रमुख बिंदु यही हैं।
जीत की बुआ का कहना है कि पुलिस धोखा दे रही है। परिजनों की मांग है कि इस मामले में केस दर्ज कर आरोपी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई हो। जीत की बुआ की शिकायत करने पर एसएसपी ने पुलिस कर्मियों को हिदायत दी है कि वह पीड़ित परिवार को परेशान नहीं करें।
गौरतलब है कि इस मामले में सांसद विद्युत वरण महतो, जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता की पत्नी सुधा गुप्ता आदि ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। एसएसपी ने भी इस मामले में न्यायिक जांच की अनुशंसा कर दी है।

