रांची : विद्या, बुद्धि और ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की आराधना का पावन पर्व बसंत पंचमी इस वर्ष 23 जनवरी को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार इस बार बसंत पंचमी पर कई शुभ और दुर्लभ योग बन रहे हैं, जिससे इस दिन का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व और बढ़ गया है। उदया तिथि के अनुसार पर्व 23 जनवरी को ही मनाया जाएगा और पूरे दिन मां सरस्वती की पूजा-अर्चना का विधान रहेगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी का पर्व माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इसी दिन देवी सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। इस कारण यह दिन विशेष रूप से विद्यारंभ, गुरुदीक्षा, अध्ययन और सृजनात्मक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
बसंत पंचमी पर बन रहे शुभ योग
ऋषिकेश पंचांग के मुताबिक, इस वर्ष बसंत पंचमी के दिन लक्ष्मी नारायण योग, बुधादित्य योग और परिघ योग का शुभ संयोग बन रहा है। इन योगों को ज्योतिष में अत्यंत फलदायी और दुर्लभ माना गया है।
इन योगों में किए गए कार्यों के सफल होने की मान्यता है। विशेष रूप से विद्यार्थियों, शिक्षकों, लेखकों, कलाकारों और बौद्धिक कार्यों से जुड़े लोगों के लिए यह दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पूरे दिन रहेगा विद्यारंभ और पूजा का महत्व
23 जनवरी को सुबह से शाम तक मां सरस्वती की स्थापना और पूजा की जा सकेगी। इस दिन बुध, सूर्य और शुक्र ग्रहों की युति विद्या, बुद्धि और ज्ञान वृद्धि के लिए विशेष फल प्रदान करने वाली मानी जाती है।
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विद्यारंभ संस्कार, नई शिक्षा की शुरुआत, संगीत, कला, लेखन और अध्ययन से जुड़े कार्य आरंभ करना शुभ होता है। इसके साथ ही नई वस्तु, वाहन या शैक्षणिक सामग्री की खरीदारी भी इस दिन शुभ मानी जाती है।
पूजा विधि और धार्मिक परंपरा
बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा सफेद और पीले रंग के वस्त्रों और फूलों से की जाती है। देवी को रोली, अक्षत, धूप, दीप और पुष्प अर्पित किए जाते हैं। पीला रंग बसंत ऋतु और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। विद्यार्थी इस दिन अपनी पुस्तकों, वाद्य यंत्रों और लेखन सामग्री की पूजा करते हैं और मां सरस्वती से विद्या, एकाग्रता और सफलता का आशीर्वाद मांगते हैं।
पंचांग के अनुसार तिथि और शुभ मुहूर्त
पुरोहितों के अनुसार, ऋषिकेश पंचांग के मुताबिक बसंत पंचमी की तिथि 22 जनवरी 2026 की रात्रि 01.16 बजे से प्रारंभ होकर 23 जनवरी की रात्रि 12.08 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के कारण बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी को मनाया जाएगा।
पूजा के लिए विशेष शुभ मुहूर्त सुबह 09.27 बजे से दोपहर 02.34 बजे तक रहेगा। इस अवधि में मां सरस्वती की पूजा-अर्चना करना विशेष फलदायी माना गया है। धार्मिक दृष्टि से बसंत पंचमी न केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत है, बल्कि यह ज्ञान, संस्कार और सृजनात्मक ऊर्जा का पर्व भी है। इस दिन की गई पूजा और साधना को जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला माना जाता है।

