RANCHI: झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पाण्डेय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दावोस और यूके यात्रा को लेकर भारतीय जनता पार्टी के आरोपों पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और भाजपा को व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के फॉरवर्ड मैसेज से ऊपर उठकर तथ्यों को समझने की जरूरत है। मुख्यमंत्री की विदेश यात्रा पूरी तरह से उच्च स्तर पर स्वीकृत है और इसका उद्देश्य झारखंड के लिए वैश्विक निवेश, संवाद और साझेदारी को मजबूत करना है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन केवल एक औपचारिक बैठक के लिए नहीं, बल्कि कई प्रतिष्ठित कार्यक्रमों और अंतरराष्ट्रीय संवादों में भाग लेने जा रहे हैं। वे पूरी तैयारी, स्पष्ट विजन और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ भारत और झारखंड का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। यह वही समावेशी और सहयोगी भारत की छवि है, जिस पर देश को गर्व है।
विपक्ष को दी चुनौती
उन्होंने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि विपक्ष यह समझने की कोशिश करे कि कोई राज्य महज छह हफ्तों की तैयारी में दावोस कैसे पहुंचता है और भारत यूके मुक्त व्यापार समझौते के तुरंत बाद यूके पहुंचने वाला पहला राज्य कैसे बनता है। यह उपलब्धि बयानबाजी से नहीं, बल्कि दूरदर्शी नेतृत्व और सक्षम शासन से हासिल होती है।
झामुमो महासचिव ने यह भी कहा कि यह झारखंड के लिए गर्व का विषय है कि मुख्यमंत्री को ऑल सोल्स कॉलेज और सेंट जॉन कॉलेज जैसी ऐतिहासिक संस्थाओं में आधिकारिक मान्यता मिली। उन्होंने ब्लावटनिक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट में व्याख्यान दिया। सेंट जॉन कॉलेज वही संस्थान है जहां मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा ने शिक्षा प्राप्त की थी। इसके साथ ही विनोद पाण्डेय ने महाराष्ट्र की भाजपा सरकार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब झारखंड का मुख्यमंत्री दावोस जाता है तो भाजपा उसे पर्यटन बताती है। लेकिन जब महाराष्ट्र सरकार दावोस में लोढ़ा डेवलपर्स के साथ समझौता करती है तो वही काम विकास मॉडल बन जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोढ़ा डेवलपर्स के मालिक मंगल प्रभात लोढ़ा महाराष्ट्र सरकार में भाजपा मंत्री हैं और एमओयू पर उनके बेटे ने हस्ताक्षर किए, जो हितों के टकराव का स्पष्ट उदाहरण है।

