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RANCHI HEALTH NEWS: राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर 10 फरवरी को मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन अभियान, जानें किन लोगों को नहीं खिलाई जाएगी दवा 

4,91,014 लोगों को दवा खिलाने का रखा गया है लक्ष्य

by Vivek Sharma
4,91,014 लोगों को दवा खिलाने का रखा गया है लक्ष्य
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RANCHI: राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन के तहत में 10 फरवरी मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन अभियान चलाया जाएगा। उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने जिलेवासियों से इस अभियान में लोगों से भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि फाइलेरिया जैसी रोकथाम योग्य बीमारी को जड़ से समाप्त किया जा सकता है।जिले में 619 बूथों पर दवा खिलाने की व्यवस्था की गई है। जिसमें राहे, तमाड़, सोनाहातु और कांके प्रखंड विशेष रूप से शामिल हैं। इस अभियान के तहत लगभग 4,91,014 लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। गर्भवती महिलाओं, दो वर्ष से कम आयु के बच्चों और गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को छोड़कर सभी लोगों को डीईसी और एलबेंडाजोल की गोली खिलाई जाएगी।

प्रशासन ने लोगों से अनुरोध किया है कि जो लोग 10 फरवरी को बूथ तक नहीं पहुंच पाएंगे, उन्हें 25 फरवरी तक घर-घर जाकर दवा उपलब्ध खिलाई जाएगी। इसके अलावा कुछ प्रखंडों में विशेष कैंप भी लगाए जाएंगे। अभियान में बेहतर कार्य करने वाले महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।

उपायुक्त ने लोगों से अपील की है कि वे खुद दवा लें और परिवार व पड़ोसियों को भी प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि शत-प्रतिशत दवा सेवन ही फाइलेरिया उन्मूलन की कुंजी है। आशा कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य कर्मियों, जीविका समूहों और सामुदायिक नेताओं के सहयोग से रांची को फाइलेरिया मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

इन बातों का रखें ध्यान 

फाइलेरिया को रोकने के लिए वर्ष में एक बार DEC (डाईथाइलकार्बामाज़ीन) और एल्बेंडाजोल की गोली लेनी चाहिए। तेज सूजन होने पर एंटीबायोटिक्स भी दी जा सकती हैं।

प्रभावित अंग (हाथ या पैर) को प्रतिदिन साबुन और साफ पानी से धोना, फिर मुलायम कपड़े से सुखाना बेहद जरूरी है

प्रभावित अंग को दिन में कई बार ऊपर (हृदय के स्तर से ऊपर) उठाएं ताकि तरल पदार्थ का बहाव हो सके।

घावों को फंगस या बैक्टीरिया से बचाने के लिए एंटीफंगल/एंटीबैक्टीरियल क्रीम का प्रयोग करें।

मच्छरों के काटने से बचें, मच्छरदानी का प्रयोग करें और शरीर को ढक कर रखें।

रात के समय रक्त परीक्षण के द्वारा फाइलेरियल कृमि की जांच की जाती है, क्योंकि ये रात में ही सक्रिय होते हैं।

बच्चों की उम्र, लंबाई और वजन के आधार पर दवाओं की खुराक निर्धारित की जाती है।

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