जमशेदपुर : महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर रविवार को पूरा शहर आध्यात्मिक माहौल से सराबोर रहा। सुबह से ही श्रद्धालु बेलपत्र, धतूरा, नारियल आदि लेकर भोलेबाबा का जलाभिषेक करने के लिए मंदिरों में कतारबद्ध रहे, तो कई भक्तों ने घर पर ही भोलेनाथ की पूजा-अर्चना में लीन रहे। साकची में बाजार स्थित शिव मंदिर, शिव-दुर्गा मनोकामना नाथ, शीतला मंदिर, कचहरी बाबा मंदिर, बिष्टुपुर, टेल्को व गोविंदपुर के राम मंदिर, बागबेड़ा के सांढ़ बाबा मंदिर, गोलमुरी शिव मंदिर व पशुपतिनाथ मंदिर, पारडीह काली मंदिर आदि में श्रद्धालुओं की भीड़ दोपहर तक लगी रही। मंदिरों-घरों में कई श्रद्धालुओं ने रुद्राभिषेक किया, तो शाम को जगह-जगह धूमधाम से शिव बारात निकली, जिसमें काफी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

इस मौके पर इस साल भी रविवार को सोनारी के दोमुहानी संगम घाट पर स्वर्णरेखा नदी की भव्य आरती की गई। महाशिवरात्रि की संध्या बेला में घाट पर बनारस के अस्सी घाट से आए प्रसिद्ध आचार्य आशुतोष महाराज के नेतृत्व में काशी के 21 पंडित भव्य आरती की।

कार्यक्रम की शुरुआत शाम 5 बजे स्थानीय पुरोहितों की देखरेख में नदी पूजन से हुई। इसके बाद आरती हुई। इस दौरान पुष्प वर्षा, खूबसूरत आतिशबाजी और शिवजी से जुड़ी विभिन्न कलाकृतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। आयोजन में हजारों शिवभक्त जुटे थे। इससे पहले स्थानीय कलाकार कृष्णामूर्ति व टीम ने अपने भजनों से श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। आयोजन को सफल बनाने में राज्य के पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता सहित अभिषेक सिंह, सुनील गुप्ता और गोपी प्रमाणिक आदि सक्रिय रहे।
स्कूली बच्चों ने किया रुद्राष्टकम का सस्वर पाठ
जमशेदपुर : महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर रविवार को गोलमुरी के केबुल टाउन स्थित श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में प्रतियोगिता हुई, जिसमें बच्चों ने रुद्राष्टकम का सस्वर पाठ किया। इस प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर खुशवंत, दूसरे स्थान पर आदित्य राज और तीसरे स्थान पर शिवांश लाल रहे। विजेताओं के साथ सभी प्रतिभागियों को जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक और श्रीलक्ष्मीनारायण मंदिर जीर्णोद्धार समिति के संयोजक सरयू राय ने पुरस्कृत व सम्मानित किया। सभी प्रतिभागियों को अर्द्धनारीश्वर की तस्वीर, प्रशस्ति पत्र व 501 रुपये नकद दिए गए।
इस मौके पर सरयू राय ने कहा कि सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में रुद्राष्टकम की महती भूमिका है। रामायण लिखने वाले तुलसीदास के आराध्य श्रीराम थे और श्रीराम के आराध्य रहे श्रीशंकर। इस प्रकार रुद्राष्टकम आराध्य के आराध्य के बारे में लिखा गया है। इसमें आठ स्लोक हैं, जिनका हर सनातनी को प्रतिदिन पाठ करना चाहिए। अगर आठ श्लोक नहीं पढ़ सकते तो एक-दो श्लोक जरूर पढ़ना चाहिए। यह सनातन के हित में होगा।
कार्यक्रम को सफल बनाने में आशुतोष राय, साकेत गौतम, असीम पाठक, ब्रजेश सिंह उर्फ मुन्ना सिंह, कुणाल कुमार, राहुल कुमार, विकास कुमार, अमित चौधरी, समरेश कुमार आदि की महती भूमिका रही।
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