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Virat Hindu Sammelan : खूंटी के विराट हिंदू सम्मेलन में गरजे मिलिंद परांडे, बोले- ईसाई बने आदिवासी हड़प रहे आरक्षण का बड़ा हिस्सा

Virat Hindu Sammelan : हिंदू समाज द्वारा दिए गए अधिकारों का दुरुपयोग कर हिंदू परंपराओं का अपमान किया जा रहा है।

by Mujtaba Haider Rizvi
Milind Parande addresses the Virat Hindu Sammelan in Khunti, speaking on tribal reservation issues
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Ranchi : विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे ने कहा है कि जिन आदिवासियों ने अपनी परंपरागत पूजा पद्धति छोड़ दी है, वही ईसाई बनकर जनजातियों के आरक्षण का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा ले रहे हैं। इससे परंपरागत आदिवासियों के अधिकारों का हनन हो रहा है।

परांडे शुक्रवार को खूंटी के रनिया में सर्व सनातन समाज की तरफ से आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज हालत यह है कि हिंदू ही हिंदू की आबादी घटा रहा है। जबकि, मुसलमानों और ईसाइयों की जनसंख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया में 50 से अधिक इस्लामिक और 120 से ज्यादा ईसाई देश हैं। जबकि, भारत और नेपाल ही ऐसे देश हैं जहां हिंदू बहुसंख्यक हैं। ऐसे में हिंदू समाज को अपने अस्तित्व, परंपराओं और पहचान को लेकर गंभीर चिंतन करना होगा।

मिलिंद परांडे ने कहा कि हिंदू समाज विश्व का सबसे प्राचीन समाज है, जो हजारों वर्षों से अपनी परंपराओं के साथ जीवित है। उन्होंने भगवान श्रीराम के वनवास, राम मंदिर आंदोलन और झारखंड के लगभग दो हजार गांवों के सरनास्थलों की मिट्टी के राम मंदिर निर्माण में उपयोग का उल्लेख करते हुए इसे जीवंत परंपरा की मिसाल बताया।

ईसाई मिशनरी से जुड़े लोग उठा रहे आरक्षण का लाभ

उन्होंने कहा कि संविधान में जनजातीय शब्द और अनुसूचित जनजाति आरक्षण का प्रावधान आदिवासी समाज की परंपरा, पूजा पद्धति और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए किया गया था। आरोप लगाया कि 1947 के बाद आरक्षण का बड़ा हिस्सा ईसाई मिशनरियों से जुड़े लोगों को मिला, जबकि परंपरागत आदिवासी इससे वंचित रह गए। इस क्रम में उन्होंने कार्तिक उरांव द्वारा ईसाई धर्म अपनाने वालों को आरक्षण से बाहर रखने के लिए लाए गए विधेयक का भी उल्लेख किया, जिसे उस समय की सरकार ने स्वीकार नहीं किया था।

परांडे ने कहा कि आज हिंदू समाज द्वारा दिए गए अधिकारों का दुरुपयोग कर हिंदू परंपराओं का अपमान किया जा रहा है। उन्होंने जनजातीय समाज से अपनी परंपरा और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए सजग रहने की अपील की।

सम्मेलन में बिरसा मुंडा के जीवन संघर्ष का भी उल्लेख किया गया। वक्ताओं ने कहा कि जबरन धर्मांतरण और शोषण के खिलाफ आंदोलन करने के कारण उन्हें जेल जाना पड़ा और वहीं उनकी मृत्यु हुई। यह भी कहा गया कि आज भी गांवों में मतांतरण के प्रयास हो रहे हैं, जिससे सामाजिक ताना-बाना कमजोर हो रहा है।

हजारों साल तक आक्रमण का शिकार रहा हिंदू समाज

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक गोपाल शर्मा ने कहा कि हिंदू समाज हजारों वर्षों तक आक्रमणों का शिकार रहा है। मंदिरों को तोड़ा गया, जिससे समाज का आत्मबल कमजोर हुआ। उन्होंने कहा कि समाज के विघटन के लिए कहीं न कहीं हम स्वयं भी जिम्मेदार रहे हैं।

हिंदू समाज को संगठित करने के लिए बना था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

गोपाल शर्मा ने कहा कि हिंदू समाज को संगठित करने के लिए साल 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की गई थी। उन्होंने कहा कि संघ का लक्ष्य समाज को एकजुट कर देश और संस्कृति की रक्षा करना है। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू इस देश के मूल निवासी हैं और जो संविधान, मातृभूमि और परंपरा के विरुद्ध बात करेगा, उसे पहचानना जरूरी है।

कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने हिंदू समाज से एकजुट रहने, अपनी बहू-बेटियों, परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा का संकल्प लेने का आह्वान किया। सम्मेलन में आरएसएस और विहिप के कई पदाधिकारी, बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं मौजूद थीं।

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