Jamshedpur : आदिवासी सेंगेल अभियान के बैनर तले शहर में एक बड़ी रैली निकालकर देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को मांग पत्र सौंपा गया। इस मांग पत्र में आदिवासी समाज के धार्मिक अधिकारों और उनकी पहचान से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है।
रैली साकची के आमबगान मैदान से शुरू होकर जिला मुख्यालय तक पहुंची, जहां प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया। अभियान के नेता सोनाराम सोरेन ने बताया कि देश में लगभग 15 करोड़ आदिवासी, संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत अनुसूचित जनजाति के रूप में मान्यता प्राप्त हैं, लेकिन अब तक उन्हें अपने धर्म की अलग पहचान नहीं मिल सकी है।
उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत आदिवासियों को उनके पारंपरिक सरना धर्म की आधिकारिक मान्यता दी जानी चाहिए। साथ ही आगामी जनगणना में सरना धर्म के लिए अलग कॉलम कोड शामिल करने की भी मांग की गई है।
आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि आदिवासी समुदाय प्रकृति पूजक है और उनकी आस्था जंगल, पहाड़, नदी, पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं से जुड़ी होती है। उनका जीवन पूरी तरह प्रकृति और पर्यावरण के संतुलन पर आधारित है, इसलिए उनकी इस आस्था को अलग धर्म के रूप में मान्यता मिलनी चाहिए।
इसके अलावा, झारखंड और पश्चिम बंगाल में स्थित आदिवासियों के प्रमुख धार्मिक स्थलों—जैसे मरांग बुरु (पारसनाथ पहाड़) और लुगुबुरु—को अन्य धर्मों के अतिक्रमण से मुक्त कराने की भी मांग की गई है।
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