
जमशेदपुर : साहित्य कला फाउंडेशन ने छाप पुस्तक महोत्सव 3.0 के माध्यम से न केवल शहरवासियों, बल्कि देश भर से आए नामचीन हस्ताक्षरों को भी उतना ही प्रभावित किया। दो दिवसीय साहित्यिक उत्सव का दूसरा व अंतिम दिन भी उसी रोचकता के साथ संपन्न हुआ, जिस उत्साह-उमंग के साथ इसका आगाज हुआ। दूसरे दिन शनिवार को भी किताब, संवाद और कहानियों का दौर कब शुरू हुआ और कब खत्म किसी को पता ही नहीं चला। हर सत्र में सीमित अवधि के बावजूद पुस्तक और उसके लेखकों के संवाद ने श्रोताओं से भी तारतम्य बनाए रखा।

अंतिम दिन के कार्यक्रम की शुरुआत आलोचक राकेश बिहारी की पत्नी कविता ने -वो रेन लिली खिलने के दिन थे- पुस्तक के संदर्भ में बताया कि एक स्त्री कभी पूरी नींद क्यों नहीं सो पाती है। पत्रकार से साहित्यकार बनीं कविता ने बताया उन्हें किस तरह रेणु और उनकी कहानी परती परिकथा ने प्रभावित किया। उनसे बातचीत करते हुए सत्यार्थ अनिरूद्ध पंकज ने हिंदी कहानियों में खुलती सोशल मीडिया की खिड़की के बहाने कई रोचक प्रसंग उधेड़ डाले।

बीएचयू व जेएनयू के गेट से नहीं निकला : डॉ. सागर
बम्बई में का बा…, जेका बाघ के करेजा… ठोक देंगे कट्टा कपार में… जैसे गीतों से पहचान बनाने वाले बॉलीवुड के मशहूर गीतकार डॉ. सागर ने बलिया के गांव से मुंबई तक के सफर को इस अंदाज में सुनाया कि वे हर किसी के दिल में उतर गए। डॉ. सागर ने बताया कि वे बीएचयू और जेएनयू में पढ़े, लेकिन कभी कैंपस के गेट से नहीं निकले। उन्होंने वहां भी वही गीत सुनाकर लोकप्रिय हो गए, जो उन्होंने बलिया में लिखे-सुनाए थे। संयोग रहा कि उनसे बातचीत वैभव मणि त्रिपाठी ने की, जो जेएनयू में डॉ. सागर के जूनियर छात्र थे। डॉ. सागर ने बताया कि उन्होंने दूसरी कक्षा से ही गीत लिखना शुरू कर दिया था। छठी कक्षा में तो उनके लिखे गीत बलिया के मदीना मास्टर ने आकाशवाणी में गाए थे।

जेएनयू में रहते एक समय ऐसा आया कि मशहूर साहित्यकार केदारनाथ सिंह ने एक कॉलम में मेरा जिक्र किया, तो मैं पूरे कैंपस में कौतूहल का विषय बन गया। यही नहीं, अनुराग कश्यप ने मुझे जब डिनर पर बुलाया, तो निर्देशक नीरज पांडे व अनुभव सिन्हा के लिए भी गीत लिखा। मेरे गीत श्रेया घोषाल, अरिजीत सिंह सहित बॉलीवुड के तमाम गायकों ने गाए हैं।
कार्यक्रम के दौरान बहरागोड़ा कॉलेज के छात्र अनिमेष ने डॉ. सागर का पेंसिल स्केच बनाया था, जिसे जेएनयू के छात्र रहे आईजी अनूप बिरथरे ने मंच पर सम्मानित किया।

इतिहास को टटोलना मेरे लिए चैलेंज रहा : सत्य व्यास
बनारस टॉकीज फेम उपन्यासकार सत्य व्यास ने बताया कि इस किताब को आशातीत सफलता मिली थी, इसके बावजूद मैंने 1931 के दौर की कहानियों पर लिखना मेरे लिए चैलेंज रहा। उस वक्त युवाओं के पास दो ही विकल्प थे-क्रांतिकारी बनो या अंग्रेजों की नौकरी करो। ऐसे दौर में प्रेम कहानी के बीच उस दौर पर शोध करना बड़ी चुनौती थी।

उनसे संवाद करते हुए साहित्य कला फाउंडेशन की मुख्य न्यासी डॉ. क्षमा त्रिपाठी ने कहा कि यह किताब पढ़ते हुए मुझे फिल्म धुरंधर की याद आ गई। इतने खून-खराबे वाले माहौल में प्रबोध व कुमुद का प्रेम-प्रसंग भी आ गया। उन्होंने लेखक को सुझाव दिया कि इस प्रेम कहानी को अगले अंक में विस्तार देना चाहिए। सत्य व्यास ने प्रत्युत्तर में कहा- इस तरह की डिमांड हो रही है।

आरटीआई में जवाब नहीं देने को दंडित किया जाएगा : अनुज सिन्हा
झारखंड के राज्य सूचना आयुक्त अनुज सिन्हा ने सूचना का अधिकार की प्रासंगिकता पर कहा कि अब तक आरटीआई में समय पर जवाब नहीं मिलने की ढेरों शिकायतें हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। जवाब नहीं देने वालों को अब सूचना आयोग दंडित भी करेगा। इसमें 25 हजार रुपये तक अर्थदंड का प्रावधान है, तो विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा भी हो सकती है।

इस संवाद में वरिष्ठ पत्रकार श्याम किशोर चौबे और प्रभात खबर, जमशेदपुर के संपादक संजय मिश्र ने भी आरटीआई से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियों के साथ अपनी बात रखी। मॉडरेटर की भूमिका में साहित्यकार संदीप मुरारका ने भी तीखे सवालों की बौछार जारी रखी, लेकिन हर सवाल का अनुज सिन्हा ने बेबाकी से जवाब दिया। यही नहीं, उन्होंने कॉलेज छात्रों को आरटीआई मांगने के टिप्स भी दिए।

पढ़ाई ने कराया चाईबासा से लंदन तक सफर : पंकज दुबे

अंग्रेजी पुस्तक स्टोरी ऑफ लव : वन स्ट्रिंग अटैच्ड के लेखक पंकज दुबे ने चाईबासा से लंदन तक के सफर की दास्तान सुनाते हुए किताब लिखने की प्रक्रिया भी विस्तार से बताई। करीम सिटी कॉलेज के मास कम्यूनिकेशन विभाग की अध्यक्ष डॉ. नेहा तिवारी से संवाद करते हुए बताया कि यह पढ़ाई की बदौलत ही संभव हुआ। हालांकि, डीएवी चाईबासा से लेकर आगे तक मैं पढ़ाई में फिसड्डी रहा, लेकिन पढ़ना जारी रखा। इसी की बदौलत पिताजी से मुझे दिल्ली, फिर लंदन तक जाने का मौका मिला। वहां जेके रोलिंग की किताब हैरी पॉटर के लिए जो जुनून देखा, उसने मुझे पुस्तक लिखने की प्रेरणा दी। मैंने सरल अंग्रेजी में किताब इसलिए लिखी, ताकि उसे हर कोई बिना डिक्शनरी खोले समझ सके।
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