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JAMSHEDPUR : जूनियर शिक्षकों को वरीयता सूची में दिखाया ऊपर शिक्षक संघ ने दर्ज कराई आपत्ती

by Rakesh Pandey
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जमशेदपुर: जिले के प्रारंभिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को प्रोन्नति देने की प्रक्रिया जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय की ओर से शुरू की गई है। इसके लिए जिले में कार्यरत सभी शिक्षकों का औपबंधिक मास्टर वरीयता सूची का प्रकाशन किया गया है। लेकिन अब इस सूची को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं और इसमें अलग-अलग प्रकार की स्थानीय निकाली जा रही हैं।

झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ का कहना है कि राजकीयकृत प्रारंभिक विद्यालय शिक्षक प्रोन्नति नियमावली 1993,विभागीय संकल्प संख्या 3027 दिनांक 14/ 12 /2015, संकल्प संख्या 1145 दिनांक 18/07/2019 ,संकल्प संख्या 619( विधि)दिनांक 26/08/2019 तथा संकल्प संख्या 936( विधि)दिनांक 14/11/2022 के प्रावधान के अनुरूप सचिव ,स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग रांची द्वारा  औपबंधिक वरीयता सूची का प्रकाशन जिला शिक्षा अधीक्षक द्वारा करने का आदेश दिया गया है।

उपरोक्त संकल्प संख्या 619 (विधि )दिनांक 26/08/2021 के कंडिका 3 के उप कंडिका 3 में ग्रेड 3,4 एवं 7 में नियत तिथि से वैचारिक प्रोन्नति प्रदान करने की बात कही गई है । संकल्प संख्या 1145 दिनांक 18/07/ 2019 की कंडिका 7(ख)3 मेंभी वैचारिक प्रोन्नति का उल्लेख है। विभागीय पत्रांक 936( विधि) दिनांक 14/ 11/2022 में दिए गए आदेश के क्रमांक 2 पर भी वैचारिक प्रोन्नति का उल्लेख है! वर्ष 1993 नियमावली के अनुसार प्रत्येक वर्ष वरीयता सूची का प्रकाशन कर ,पद उपलब्धता की तिथि से अहर्ता रखने वाले शिक्षकों को ग्रेड 4 में एवं अन्य ग्रेडों में प्रोन्नति देना था ।  ससमय प्रोन्नति नहीं मिलने से शिक्षक आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक रूप से भी प्रताड़ित हो रहे हैं। जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय द्वारा दिनांक 30 मई 2023 को प्रकाशित औपबंधिक वरीयता सूची में घोर आपत्तियां हैं जिसे दूर किया जाना चाहिए।

 

संघ ने इन आपत्तियों को उठाया:

1) औपबंधिक वरीयता सूची के प्रकाशन पूर्व योग्य शिक्षकों को वैचारिक रूप से प्रोन्नति दी जानी  चाहिए थी।

2) वर्ष 2016 में नियुक्त स्नातक प्रशिक्षित शिक्षकों को औपबंधिक वरीयता सूची में वर्ष 1994 में नियुक्त एवं वर्ष 2017 में ग्रेड 4 प्राप्त शिक्षकों से ऊपर दर्शाया गया है जो वरीय शिक्षकों के साथ घोर अन्याय है विभागीय आदेश के बावजूद वैचारिक रूप से प्रोन्नति ना देकर कनीय शिक्षकों को वरीयता सूची में ऊपर रखना नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध है

3) वर्ष 2016 में स्नातक प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति अधिसूचना संख्या 1632 दिनांक 05 /09/ 2012 के आलोक में हुई यह एक नियुक्ति नियमावली है अतः वर्ष 2016 में नियुक्त शिक्षकों पर प्रोन्नति नियमावली 1993 लागू नहीं होगा वर्ष 2016 में नियुक्त स्नातक प्रशिक्षित शिक्षकों के लिए प्रोन्नति नियमावली अब तक बनी ही नहीं है इस निमित्त कहना चाहेंगे कि जारी वरीयता सूची में वर्ष 2016 में नियुक्त प्रशिक्षित शिक्षकों का नाम दर्ज करना नैसर्गिक न्याय के प्रतिकूल है।

4) औपबंधिक वरीयता सूची के क्रमांक 197 पर ग्रेड 4 में योगदान की तिथि 27/01/ 2017 दर्शाया गया है जबकि ग्रेड 4 में प्रोन्नति का पत्र 28/01/ 2017 को निर्गत हुआ है

5) औपबंधिक वरीयता सूची में क्रमांक 198 से 229 तक में ग्रेड 4 में योगदान की तिथि 28/01/ 2017 दर्ज है जबकि 28/01/ 2017 को पत्र निर्गत हुआ है

6) औपबंधिक वरीयता सूची में क्रमांक 231 एवं 232 पर अंकित शिक्षकों की नियुक्ति उर्दू शिक्षक के रूप में हुई है जिन्हें सामान्य मेधा क्रमांक के आधार वरीयता सूची में अंकित किया गया है है जो उचित नहीं है।

7) औपबंधिक वरीयता सूची में क्रमांक 217 तथा 218 तथा क्रमांक 155 एवं156 एवं कई ऐसे अन्य जगहों पर एक ही शिक्षक की दोहरी प्रविष्टि की गई है।

8) अंतर जिला से स्थानांतरित होकर इस जिले में आए शिक्षकों को भी वरीयता सूची में उपर रखा गया है।

अतः वर्णित परिपेक्ष्य में झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ का जिला शिक्षा अधीक्षक महोदया से अनुरोध है कि उपयुक्त आपत्तियों का निराकरण यथाशीघ्र करने की कृपा करें अन्यथा बाध्य होकर संघ माननीय उच्च न्यायालय जाने को बाध्य होगा

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