

राउरकेला : जगह जगह रजो का त्योहार बड़े ही ज़ोरों शोरों से मनाया जा रहा है। लड़कियां और औरतें इस त्योहार का बहुत ही बेसबरी से इंतज़ार करते हैं। इस त्योहार में न लड़कियां और न ही औरतें कोई भी काम नहीं करते। सिर्फ मौज करते हैं । साल भर काम कर कर के जब महिलाएं थक जाते हैं उन्हे यही 5 दिन मिलता है जहां वो शांति से बिना किसी चिंता के मौज कर सकती हैं । आज है रजो का चौथा दिन, जिसको हम लोग भूमि दहन के नाम से जानते।

आज के दिन कोई भी लड़की सजती नहीं है। पहले का जो भी सजाते हैं वही शृंगार में वो लोग आज के दिन रहते। और कल यानि आखरी दिन जो की है बसुमती स्नान बोलते हैं। इस दिन लड़कियां नाहती हैं । क्योंकि पिछले 4 दिनों से वो नहाये रहते है। कल यानि रजो के दूसरे दिन जो के रजो संक्रांति के नाम से जानते हैं उस दिन बच्चे बहुत ही प्यार से रजो माना रहे थे । असली मूल तत्व रजो के कही खो से गए है पर राउरकेला में विभिन्न जगह पर रजो उत्सव का कार्यकर्म करके इस संस्कृति को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहे।

