

नयी दिल्ली. मणिपुर में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालत की समीक्षा के लिए गृहमंत्री अमित शाह शनिवार अपराह्न तीन बजे से दिल्ली में ऑल-पार्टी मीटिंग बुलायी है। मणिपुर के शिक्षा मंत्री बसंता सिंह ने बताया कि मीटिंग में राष्ट्रीय पार्टियों के साथ मणिपुर के मुद्दे पर चर्चा होगी। हालांकि, इस बैठक को कांग्रेस ने बहुत लेट और नाकाफी बताया है। कांग्रेस का कहना है कि अगर मणिपुर के लोगों के साथ बातचीत की कोशिश दिल्ली में बैठकर की जायेगी, तो इसमें गंभीरता नहीं दिखेगी। राहुल गांधी ने इस बैठक पर सवाल उठाते हुए ट्वीट कर कहा कि बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पीएम मोदी अमेरिका की यात्रा पर हैं, इससे पता चलता है कि यह बैठक पीएम के लिए महत्वपूर्ण नहीं है।

आखिर क्या है पूरा विवाद
आरक्षण को लेकर कोर्ट की ओर से सरकार को दिये गये एक निर्देश के बाद कूकी व मैतयी समुदाय के लोग आमने-सामने आ गये हैं। दोनों समुदाय एक दूसरे के खून के प्यासे हो गये हैं। अब तक सैकड़ों की संख्या में लोग जान गंवा चुके हैं। वहीं कई लोग अस्पतालों में जीवन और मौत के बीच झूल रहे हैं। हर दिन कही न कही घटनाएं घट रही हैं। स्थानीय पुलिस व आम लोग आमने-सामने है। पूरे राज्य में गृह युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं. इस पर राज्य की भापजा सरकार शांति बहाल करने में अब तक पूरी तरह नाकाम रही है। मणिपुर में 3 मई से शुरू हुई हिंसा के 51 दिन पूरे हो गये हैं, लेकिन हालात सामान्य नहीं हुए हैं।


सरकार तब जागी, जब हिंसा से पूरा राज्य जलने लगा
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा था कि ऑल-पार्टी मीटिंग इंफाल में होनी चाहिए। इस पर मणिपुर के शिक्षा मंत्री बसंता सिंह ने कहा कि जयराम रमेश को पता नहीं है कि पिछले महीने इंफाल में एक ऑल-पार्टी मीटिंग हो चुकी है। इस मीटिंग में पूर्व सीएम और कई कांग्रेस नेता शामिल हुए थे। अमित शाह के मणिपुर दौरे के समय भी विपक्षी पार्टियों की मीटिंग बुलायी थी। मणिपुर में जारी हिंसा के बीच कई पार्टियां राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग कर रही हैं। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मीटिंग में राष्ट्रपति शासन पर चर्चा की संभावना नहीं है।
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असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा की अमित शाह से मीटिंग के बाद यह फैसला लिया गया है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार तब जागी है जब सोनिया गांधी ने मणिपुर के लोगों को संबोधित किया। इस गंभीर समस्या पर होनी वाली बैठकों से पीएम का दूर रहना उनकी कायरता दिखाता है। ऐसे हालात में भी मणिपुर की पक्षपात करने वाली सरकार को न हटाना और राष्ट्रपति शासन लागू न करना एक मजाक जैसा लग रहा है।
