

भुवनेश्वर : ओडिशा के नबरंगपुर में एडिशनल सब-कलेक्टर प्रशांत राऊत को विजिलेंस की टीम ने नबरंगपुर से अरेस्ट कर लिया। प्रशांत के पास उनकी आय से 506% से ज्यादा की संपत्ति मिली। गिरफ्तारी से पहले प्रशांत के घर और ऑफिस समेत 9 जगहों पर 3 दिन तक छापा मारा गया। राऊत को सुंदरगढ़ विजिलेंस कोर्ट में पेश किया जायेगा। ओडिशा पुलिस की सतर्कता शाखा ने यह कार्रवई की है।

अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि सतर्कता शाखा ने ओडिशा प्रशासनिक सेवा (ओएएस) के अधिकारी प्रशांत कुमार रौत के भुवनेश्वर स्थित घर और अन्य ठिकानों पर छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी बरामद की है। रौत नबरंगपुर जिले में उप कलेक्टर के तौर पर तैनात हैं। अधिकारियों के मुताबिक, जब सतर्कता शाखा के अधिकारी आरोपी अफसर के यहां कनान विहार स्थित घर पहुंचे,

तो उनकी पत्नी ने नकदी से भरे छह गत्ते पड़ोसी की छत पर फेंक दिए और उनसे रकम छिपाने के लिए कहा। उन्होंने बताया कि बाद में पड़ोसी के घर से सभी गत्तों को बरामद कर लिया गया और नकदी को गिनने के लिए गणना करने वाली कई मशीनों का इस्तेमाल किया गया।अधिकारियों के अनुसार, रौत के नबरंगपुर आवास से 89.5 लाख रुपये नकद और सोने के जेवरात बरामद किए गए हैं।

सतर्कता विभाग की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, यह राज्य में किसी सरकारी अधिकारी के यहां से सबसे ज्यादा नकद बरामदी का दूसरा मामला है। अप्रैल 2022 में, हमने कार्तिकेश्वर राउल की संपत्तियों पर छापेमारी के दौरान 3.41 करोड़ की नकदी बरामद की थी। वह गंजम जिले में लघु सिंचाई प्रमंडल में सहायक अभियंता के तौर पर तैनात थे।
रौत को 2018 में एक पंचायत कार्यकारी अधिकारी से एक लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उस वक्त वह सुंदरगढ़ जिले में बीडीओ (ब्लॉक विकास अधिकारी) के पद पर कार्यरत थे। वहीं पैसे लेने में के मामले में प्रशांत कुमार रौत पहले भी गिरफ्तार हो चुका है. उसपर रिश्वत देने का मामला दर्ज हुआ था. इस कार्रवाई पर लोगों उसके ऑफिस के सामने मिठाई बांट कर उत्साह मनाया.
एक लाख रुपए रिश्वत मामले में पहले भी जा चुका है जेल
प्रशांत कुमार ओडिशा प्रशासनिक सेवा में 1996 बैच का अधिकारी था। उसकी पोस्टिंग बालासोर, बरगढ़, जाजपुर, केंद्रपाड़ा और कटक में भी रही। उसने पहले जाजपुर केंद्रपाड़ा में तहसीलदार के तौर पर काम किया। 6 नवंबर 2018 में प्रशांत को सुंदरगढ़ जिले के बिसरा ब्लॉक बीडीआई के तौर पर एक लाख रुपए रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था। बाद में उसे नौकरी से सस्पेंड कर दिया गया। 18 जनवरी 2020 में उसे अतिरिक्त उप-जिला कलेक्टर के रूप में नबरंगपुर में तैनात किया गया था।
