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झारखंड के अंगीभूत कॉलेजों में पढ़ाने वाले इंटर के शिक्षक अब आंदोलन की राह पर: नाैकरी जाने का डर, 5 हजार लोगों ने लगाया काला बिल्ला,जानिए क्या है पूरा मामला

by Rakesh Pandey
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जमशेदपुर: राज्य पोषित विश्वविद्यालयों के अंगीभूत महाविद्यालयों में पिछले सत्र तक इंटरमीडिएट का नामांकन लिया गया। राज्य गठन के पहले से यह परंपरा चलती आ रही थी। नयी शिक्षा नीति लागू होने के बाद झारखंड सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के निर्देश के आलोक में नये सत्र 2023-24 से डिग्री कॉलेजों में इंटर प्रथम वर्ष यानी ग्यारहवीं के नामांकन पर रोक लगा दी गयी।

इंटरमीडिएट की कक्षाओं का संचालन बंद किए जाने से राज्य में करीब पांच हजार से अधिक संविदा शिक्षकों की नौकरी खत्म होने का खतरा पैदा हो गया। इसके विराेध में इंटर के शिक्षकाें ने आंदाेलन की शुरुआत कर दी है। सोमवार को शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मियों ने सामूहिक रूप से काला बिल्ला लगाकर सरकार की नीतियों का विरोध किया। अपनी मांगों के समर्थन और निर्णय के विरोध में जगह-जगह महाविद्यालयों में नारेबाजी की।

कहां हुआ विरोध प्रदर्शन, कौन-कौन रहा शामिल

जमशेदपुर के मानगो स्थित जमशेदपुर वर्कर्स कॉलेज महाविद्यालय में प्रदर्शन किया गया। शिक्षकाें ने पूरे राज्य भर के शिक्षक एवं कर्मचारियों के साथ सरकार की नीतियों का विरोध किया। डिग्री कॉलेजों में 11वीं में नामांकन शुरू करने एवं अपने समायोजन की मांग की। छात्र भी अपने नामांकन के लिए राज्य भर के विश्वविद्यालयों में उग्र आंदोलन कर रहे हैं। सरकार एवं अधिकारियों की तरफ से इस मामले में सिर्फ और सिर्फ आश्वासन दिया रहा है। मसले को हल करने के लिए अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गयी है। इस विरोध प्रदेश प्रदर्शन में जावेद अख्तर अंसारी, सुमन कुमारी सिन्हा, रिंकी बंसियार, तजेंदर कौर, रेशमी बारला, नीतीश कुमार, नीरज कुमार, सैसव सरकार, रौशन कुमार, लाली कुमारी आदि सहित सभी कर्मी मौजूद रहे।

कहां-कहां फंसा है पेंच

डिग्री कॉलेजों में इंटरमीडिएट की पढ़ाई करने में सबसे बड़ी बाधा नयी शिक्षा नीति के प्रावधानों को लेकर है। इसका हवाला देते हुए उच्च शिक्षा ने नामांकन रोक दिया है। इसके अलावा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग लंबे समय से झारखंड सरकार के उच्च शिक्षा विभाग को इस संबंध में पत्राचार करता रहा है।

इसमें डिग्री काॅलेजों से इंटर को तत्काल अलग करने के लिए कहा जाता रहा है। यूजीसी ने बकायदा अधिसूचना जारी कर स्पष्ट किया कि अगर किसी डिग्री कॉलेज में कोई शिक्षक इंटर की कक्षाएं लेता है तो ऐसे में छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार वेतन निर्धारण नहीं किया जा सकता। ऐसे में कई जगहों पर इंटर को अलग यूनिट बताकर छठवें वेतनमान की सिफारिशें लागू की गयीं।

इंटर की कक्षाएं डिग्री कॉलेजों में चलाने के पीछे राज्य सरकार की सबसे बड़ी मजबूरी पर्याप्त संख्या में प्लस टू स्कूलों की अनुपलब्धता रही। दसवीं पास करने वाले सभी बच्चों के सरकारी प्लस टू स्कूलों में नामांकन की व्यवस्था नहीं थी। धीरे-धीरे स्थिति में सुधार हुआ है लेकिन अब भी कहीं जगहों पर छात्र-छात्राओं के नामांकन के लिए बेहतर प्लस टू सरकारी स्कूल का विकल्प मौजूद नहीं है। ऐसे में छात्र दाखिले के लिए कॉलेजों के चक्कर लगा रहे हैं।

क्या है मौजूदा स्थिति

नई शिक्षा नीति के आलोक में झारखंड के 62 अंगीभूत महाविद्यालयों में इंटर की पढ़ाई बंद कर दी गई है। राज्य में मौजूदा स्थिति यह है कि लाखों की संख्या में ग्रामीण एवं शहरी परिवेश के बच्चे इधर-उधर नामांकन की तलाश में भटक रहे हैं। उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। अगर डिग्री काॅलेज में नामांकन शुरू नहीं हाेता है ताे पूरे राज्य भर के लगभग 5000 शिक्षक व कर्मचारी बेरोजगार हो जाएंगे।

ये शिक्षक डिग्री काॅलेजाें में फिर से नामांकन शुरू करने या उन्हें समायाेजित करने की मांग कर रहे हैं। इसके लिए वे राजभवन के समक्ष धरना प्रदर्शन भी कर चुके हैं। अभी तक उनकी मांगाें पर सरकार की तरफ से काेई आश्वासन नहीं मिला है।

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