जमशेदपुर, एस्ट्रोलॉजी डेस्क: छिपकली का शरीर के अलग-अलग अंगों पर गिरने को भारतीय लोक-परंपरा में शुभ और अशुभ संकेत के रूप में माना जाता रहा है। यह परंपरागत मान्यता धार्मिक और आध्यात्मिक संस्कृति से जुड़ी हुई है। लोग इन संकेतों के आधार पर भविष्यवाणी, अभिप्रेत या धार्मिक घटनाओं के बारे में अनुमान लगाने का प्रयास करते हैं। हालांकि, इन संकेतों के वैज्ञानिक आधार की कोई प्रामाणिक जानकारी नहीं है।

विज्ञान और विश्वास के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण
विश्वास करने या उनके आधार पर कोई निश्चित निष्कर्ष निकालने से पहले हमें विज्ञान और तर्क का सम्मान करना चाहिए। छिपकली के शरीर के अंगों पर गिरने को शुभ और अशुभ संकेतों के अलावा, कुछ लोग उन्हें भविष्यवाणी के लिए या धार्मिक पूजा-अर्चना के दौरान सांकेतिक बताने में भी इस्तेमाल करते हैं। यह भारतीय संस्कृति में एक प्राचीन और परंपरागत अनुष्ठान है, जिससे लोग अपने जीवन को सफलता और शुभता से भरने की कोशिश करते हैं। हालांकि, विज्ञान और विश्वास के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है ताकि हम अपने जीवन के निर्धारित मार्ग पर चल सकें।
छिपकली के शरीर के किन अंगों पर गिरने को शुभ माना जाता है?
दाहिनी आंख: छिपकली के दाहिनी आंख पर गिरने को शुभ संकेत माना जाता है। इसे धन की प्राप्ति और आर्थिक समृद्धि की संभावना का संकेत माना जाता है।
माथा: छिपकली के शरीर के माथे पर गिरने को भी शुभ संकेत माना जाता है। यह सफलता और प्रतिष्ठा की प्राप्ति के लिए संकेत कर सकता है।
पैर: छिपकली के पैर पर गिरने को भी शुभ संकेत माना जाता है। इसे यात्रा या सफलता की प्राप्ति के लिए संकेत के रूप में देखा जाता है।
गर्दन : ऐसा माना जाता है कि छिपकली के गर्दन पर गिरने से यश की प्राप्ति होती है। लोगों की पहचान अधिक से अधिक जगह में होती है। ऐसे व्यक्ति की लोग तारीफ करते हैं।
दायां कान: दाहिने कान पर छिपकली गिर जाए तो इसे आभूषण की प्राप्ति के संकेत के रूप में देखा जाता है। ऐसा कहा जाता रहा है कि जातक को आभूषण से जुड़ा कुछ प्राप्त होता है
बायां कान : कहा जाता है कि बायीं ओर के कान पर छिपकली गिरने का मतलब जातक के आयु में वृद्धि होती है। शरीर स्वस्थ रहता है। रोग नहीं होता है।
नाक : नाक पर गिरने से भाग्योदय जल्दी होता है। उन्नति होती है।
बायां गाल : बायीं गाल पर छिपकली गिरने का मतलब कुछ पुराने मित्रों व सहयोगियों से मुलाकात होती है, ऐसा माना गया है।
और तरह की भी हैं बातें
यदि छिपकली किसी अशुभ स्थान पर गिर जाए तो उसे भी लोग अशुभ संकेत मानते हैं, लेकिन इसमें कोई नियम नहीं है। यह व्यक्ति के धार्मिक अनुष्ठान और परंपराओं पर आधारित होता है। कुल मिलाकर, छिपकली के शरीर के अंगों पर गिरने का शुभ और अशुभ संकेतों का विश्वास भारतीय संस्कृति में प्राचीन समय से ही रहा है। यह आध्यात्मिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है, जिसका मकसद व्यक्ति के जीवन में समृद्धि, सफलता, और शुभता को आकर्षित करना है।
छिपकली का किस अंग पर गिरना होता है अशुभ
छिपकली के शरीर के कुछ अंगों पर गिरने को अशुभ संकेत के रूप में भी जाना जाता है।
बायीं भुजा: बायीं ओर की भुजा पर छिपकली गिरने पर धन की हानि होती है। ऐसी मान्यता है कि छिपकली बायीं भुजा पर गिरने से कहीं ना कहीं धन का नाश होता है।
बायीं हथेली : बायीं हथेली पर छिपकली गिरने से धन की हानि होती है
बायें कंधे: यह भी माना जाता है कि बायें कंधे पर अगर छिपकली गिरे तो दुश्मनी बढ़ती है। कई शत्रु बन जाते हैं जो कि कामों को नुकसान पहुंचाते हैं।
बायीं छाती: बायीं छाती पर छिपकली गिरने से घर में ज्यादा झगड़ा होता है। आशांति पैदा होती है।
बायीं जांघ : बायीं जांघ पर छिपकली गिरने से दुख ही दुख यानी शारीरिक पीड़ा होता है। धन की हानि होती है
दाढ़ी : दाढ़ी पर छिपकली गिरने का मतलब आपके सामने जल्दी कोई भयावह घटना हो सकती है।
बायीं आंख: बायीं ओर की आंख पर छिपकली गिरने को अशुभ संकेत के रूप में देखा जाता है। इसे धन की हानि या आर्थिक समस्याएं होने का संकेत माना जाता है।
गर्दन: छिपकली के गले पर गिरने को भी अशुभ संकेत माना जाता है। इससे व्यक्ति को स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं हो सकती हैं या व्यक्ति को किसी बीमारी का सामना करना पड़ सकता है।
दिल: छिपकली के दिल पर गिरने को भी अशुभ संकेत माना जाता है। इसे किसी प्रियजन के साथ विवाद या दुखी होने का संकेत माना जाता है।
जाने शकुन शास्त्र क्या है?
शकुन शास्त्र एक प्राचीन भारतीय ज्योतिष शास्त्र है जो जंगली पक्षियों और पशुओं के व्यवहार का अध्ययन करके भविष्यवाणी और शुभ-अशुभ संकेतों का अनुमान लगाता है। यह शास्त्र वैदिक संस्कृति में महत्वपूर्ण माना जाता है और लोग छिपकली के जैसे जंगली पशुओं के आगमन, चलन, रंग, आवाज और अन्य लक्षणों के माध्यम से भविष्यवाणी करने का प्रयास करते हैं। शकुन शास्त्र हमारे सामने होने वाले शुभ-अशुभ घटनाएं के बारे में जानकारी देती है यह हमारे देश में सदियों से इसकी परंपरा चली आ रही है हवा किया हमारे देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी इसका प्रचलन है। शकुन मुख्य रूप से पांच प्रकार के होते हैं भौम, अंतरिक्ष, स्वप्निक, शारीरिक, विभिन्न शकुन।

