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करती रही फोन पर फोन, नहीं आई एंबुलेंस तो ठेले पर पति को रख ठेलते हुए पहुंच गई अस्पताल

by Rakesh Pandey
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सेंट्रल डेस्क: ये सोशल मीडिया का जमाना है। जहां कुछ भी मिनटों में पूरी दुनिया में पहुंच सकता है। चुनावी माहौल बनने के साथ ही मध्य प्रदेश में छिंदवाड़ा का एक वीडियो वायरल हुआ है जिसे मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के विकास मॉडल की खूब किरकिरी हो रही है। गुरुवार को वायरल हुए इस वीडियो में जो बताया गया है उसके अनुसार एक महिला अपने बीमार पति को अस्पताल ले जाने के लिए तीन घंटे तक एंबुलेंस सेवा के लिए फोन करती रही लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची। जब एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिली तो उसने खुद अपने पति को ठेले पर रखा और ठेले को धकेलते हुए तीन किमी दूर स्थित अस्पताल पहुंच गई।

कांग्रेस और भाजपा को टैग कर पूछे जा रहे सवाल

चूंकि मध्य प्रदेश में चुनावी बिगुल बज चुका है। पति को ठेले पर रखकर धकेलते हुए अस्पताल पहुंचने घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों को ही यह वीडियो टैग कर सवाल पूछे जा रहे हैं। यह मामला छिंदवाड़ा के जुन्नारदेव का बताया जा रहा है।

यह है पूरा मामला

जानकारी के अनुसार यहां रहने वाले हेमंत नागवंशी भोपाल में मज़दूरी करते थे। कुछ दिनों पूर्व उनके साथ कुछ ऐसा हादसा हुआ कि उनका पैर काटना पड़ा। छिंदवाड़ा स्थित अस्पताल में समुचित उपचार नहीं पा रहा था। बताया जा रहा है कि समुचित उपचार नहीं मिलने के कारण हेमंत का पैर सड़ने लगा था। इसके बाद पत्नी ने करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित दूसरे अस्पताल ले जाने की सोची। पत्नी गीता पति को अस्पताल ले जाने के लिए सुबह से ही 108 एंबुलेंस सेवा के लिए फोन पर फोन करती रही। तीन घंटे तक एंबुलेंस के लिए इंतजार करती रहीं। आखिर तक एंबुलेंस नहीं मिली तो उसने खुद ही हिम्मत जुटाई। पति को ठेले पर रखा और धक्का लगाते हुए चल पड़ी। ठेले को ठेलते हुए पति को लेकर वह अस्पताल पहुंच गई।

अस्पताल पहुंचने के बाद भी खत्म नहीं हुई समस्या

ठेले पर पति को लेकर अस्पताल में पहुंच कर गीता ने जैसे-तैसे इलाज के लिए पर्चा तो बनवा लिया, लेकिन इतने से उसकी समस्या खत्म नहीं हुई। डॉक्टरों के ना होने से उसे उपचार के लिए भी घंटों तक जूझना पड़ा। यह परेशानी जुन्नारदेव के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अपना एंबुलेंस नहीं होने की वजह से आई। इस मामले में अस्पताल प्रबंधन का कहना था कि यहां एक एंबुलेंस विधायक निधि से मिली तो थी, लेकिन उसका संचालन तक नहीं हो पाया है।

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क्या कहा चिकित्सा अधिकारियों ने

मामले की चर्चा होने के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जीसी चौरसिया का कहना था कि उनकी कोशिश हर मरीज को एंबुलेंस सेवा देने की रहती है। वाहन ही नहीं हैं तो लोगों को दिक्कत आएगी ही। बता दें कि इसी छिंदवाड़ा के विकास मॉडल का कांग्रेस खूब प्रचार करती रही है। यहां 44 साल तक कांग्रेस का प्रभाव रहा है जबकि पिछले 18 साल से बीजेपी भी सत्ता में है। इसी छिंदवाड़ा मॉडल कर प्रचार कर 2018 में कांग्रेस नेता कमलनाथ मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे थे। भाजपा भी छिंदवाड़ा में विकास कार्यों को गिनाते नहीं थकती है।

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