सेंट्रल डेस्क : श्रीलंका में रविवार को अचानक बिजली चली गई, जिससे पूरे देश में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। छुट्टी का दिन होने के कारण लोग आराम से अपने घरों में थे, बच्चे खेल रहे थे और लोग अपने पसंदीदा टीवी शो का आनंद ले रहे थे। लेकिन अचानक बिजली कटौती ने सभी की दिनचर्या में खलल डाला। हालांकि, इस पावर कट की वजह ने सबको हैरान कर दिया, क्योंकि यह कोई तकनीकी खराबी नहीं बल्कि एक बंदर के कारण हुआ था।

बिजली बोर्ड का बयान
सीलोन विद्युत बोर्ड ने इस मामले में बयान जारी करते हुए कहा कि रविवार को अचानक बिजली गुल हो जाने के बाद लकविजय पावर स्टेशन का संचालन बंद करना पड़ा। इसके चलते करीब 6 घंटे तक श्रीलंका के पूरे द्वीप में बिजली आपूर्ति प्रभावित रही। बयान में यह भी कहा गया कि कोलंबो के उपनगर स्थित ग्रिड स्टेशन में एक बंदर के संपर्क में आने से पावर स्टेशन ट्रिप हो गया, जिससे बिजली आपूर्ति में गड़बड़ी उत्पन्न हुई। इस घटनाक्रम ने लोगों को तो परेशान किया ही, साथ ही बिजली बोर्ड के कर्मचारियों को भी यह समस्या सुलझाने में समय लग गया।
आने वाले दिनों में भी होगी बिजली कटौती
इसके अलावा, श्रीलंका में एक और बिजली संकट की सूचना भी मिली है। कोयला आधारित विद्युत संयंत्र में आई खराबी के कारण सोमवार और मंगलवार को 90 मिनट की बिजली कटौती की संभावना जताई गई है। राज्य विद्युत इकाई, सीलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड ने बताया कि उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र स्थित 900 मेगावाट के नोरोचचोलाई कोयला संयंत्र में तकनीकी खामी के कारण बिजली की आपूर्ति में कमी आई है, जिसके चलते 90 मिनट की बिजली कटौती की योजना बनाई गई है। सीलोन विद्युत बोर्ड ने बताया कि यह कटौती दोनों दिनों में अलग-अलग स्लॉट्स में की जाएगी, जो अपराह्न 3 बजे से रात 9:30 बजे तक होगी।
देश में बिजली संकट का इतिहास
श्रीलंका में यह पहली बार नहीं हो रहा है, जब बिजली संकट की स्थिति उत्पन्न हुई हो। अगस्त 2022 के बाद, श्रीलंका को पहली बार बिजली राशनिंग का सामना करना पड़ेगा। उस समय देश गंभीर आर्थिक संकट में था, जिससे बिजली और ईंधन की भारी कमी हो गई थी। विदेशी मुद्रा की भारी कमी के कारण श्रीलंका में 12 घंटे तक बिजली कटौती की गई थी, और आवश्यक वस्तुओं की कमी के चलते लोगों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था।
2022 के बीच में, विशेष रूप से अप्रैल और जुलाई में, श्रीलंका में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे, जिसका कारण देश की बिगड़ती अर्थव्यवस्था और बिजली संकट था। इन प्रदर्शनों ने तत्कालीन राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को देश छोड़ने पर मजबूर किया और बाद में उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
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