सेंट्रल डेस्कः शनिवार को एक विशेष सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भूख हड़ताल पर बैठे किसान नेता जे एस दल्लेवाल को शंभू बॉर्डर विरोध स्थल के पास एक अस्थायी अस्पताल में शिफ्ट करने के अपने आदेश का पालन करने में पंजाब सरकार की विफलता पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। गौरतलब है कि कोर्ट ने आठ दिन पहले ही आदेश जारी किया था, लेकिन राज्य सरकार ने इसे लागू करने के लिए गंभीरता से प्रयास नहीं किया।

हम नहीं जानते, आप कैसे करेंगेः सुप्रीमकोर्ट
शीर्ष अदालत की पीठ ने कहा कि हम चाहते है कि राज्य सरकार आदेश का पालन करें। हम नहीं जानते कि आप इसे कैसे करते हैं। हम यह नहीं कह रहे हैं कि आप बल का प्रयोग करें, आपको यदि केंद्र की सहायता चाहते हैं तो हम उसके लिए निर्देश देते है। साथ ही बेंच ने आदेश पर हुई देरी पर निराशा व्यक्त की।
31 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई
अदालत ने पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा और डीजीपी गौरव यादव के लिए दो दिन की समय सीमा निर्धारित की, जो अदालत के निर्देशों के अनुसार कोर्ट रूम में वर्चुअल रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज की। जिसका उद्दयेश्य दल्लेवाल का स्थानांतरण सुनिश्चित करना था। मामले की अगली सुनवाई 31 दिसंबर को होगी। न्यायाधीशों ने चेतावनी दी कि अगर उनके आदेश का पालन नहीं किया गया तो वे अधिकारियों के खिलाफ अदालत की अवमानना का मुकदमा चलाएंगे।
यह कानून के खिलाफ है, अपराध है…..
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने किसान नेताओं द्वारा दल्लेवाल को अस्पताल में भर्ती होने से रोकने के लिए प्रदर्शन स्थल का घेराव करने पर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, ‘किसी व्यक्ति को अस्पताल ले जाने से रोकना अनसुना करना है, कानून के खिलाफ है, अपराध है… यह आत्महत्या के लिए उकसाना है। पीठ ने पूछा, ‘क्या ये किसान नेता चाहते हैं कि दल्लेवाल जिएं या मरें? वे किस तरह के किसान नेता हैं? वह निश्चित रूप से किसी के दबाव में है।
अस्पताल से भी जारी रख सकते है अनशन
आगे अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि ये किसान दल्लेवाल के शुभचिंतक नहीं हैं… कृपया दल्लेवाल को बताएं कि वे चिकित्सा सहायता और निगरानी के साथ अस्पताल में भी अनशन जारी रख सकते है, न्यायमूर्ति कांत ने पंजाब के महाधिवक्ता से कहा।
सुनवाई के दौरान एडवोकेट जनरल गुरमिंदर सिंह ने कहा कि, दल्लेवाल की मांग है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी के संबंध में यदि प्रधानमंत्री से एक आश्वासन पत्र मिल जाए, तो स्थिति को हल करने में मदद मिल सकती है। इसके जवाब में, केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, “यह इतना आसान नहीं हैं।

