नई दिल्ली: भारत एक विशाल देश है। इसमें विविधताओं से भरे कई गांव और शहर हैं। इनमें से कुछ गांव अपनी सुंदरता, आध्यात्मिकता या प्राकृतिक सौंदर्य के लिए पूरे दुनिया में जाने जाते हैं, लेकिन क्या आपको पता है? एशिया में सबसे Cleanest Village भारत में ही है। एक ऐसा गांव, जो अपनी स्वच्छता के लिए जाना जाता है। इस गांव को अंतरराष्ट्रीय तौर पर एशिया के सबसे साफ गांव के लिए पुरस्कार मिल चुका है। इसलिए इसे एशिया का क्लीनस्ट विलेज (Cleanest Village) कहा जाता है। आइए जानते हैं इस गांव के बारे में।

मौलिन्नोंग (Mawlynnong) ; खासी हिल्स डिस्ट्रिक्ट का यह गांव मेघालय के शिलांग और भारत-बांग्लादेश बॉर्डर से 90 किलोमीटर दूर है। मौलिन्नोंग (Mawlynnong) को एशिया का सबसे स्वच्छ गांव माना जाता है। साल 2014 की गणना के अनुसार, यहां 95 परिवार रहते हैं। यहां सुपारी की खेती आजीविका का मुख्य साधन है। मेघालय का मौलिन्नोंग गांव भारत ही नहीं, पूरे एशिया में सबसे खास है। इसके कई कारण हैं, जैसे यह पूरे एशिया का सबसे साफ-सुथरा गांव है। इस गांव की साक्षरता दर 100 फीसदी है, यानी यहां के सभी लोग पढ़े-लिखे हैं। इतना ही नहीं, इस गांव में ज्यादातर लोग सिर्फ अंग्रेजी में ही बात करते हैं।
घरों में ही इकट्ठा करते हैं कचरा
इस गांव की स्वच्छता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां कूड़ेदान नहीं है। यहां के लोग कचरे को अपने घरों में ही इकट्ठा करते हैं। फिर उसे इकट्ठा कर एक बड़े गड्ढे में डाल देते हैं। इस गड्ढे में डाला गया कचरा पूरी तरह से खाद बन जाता है, जिसका इस्तेमाल खेती के लिए किया जाता है।
महज 500 लोग रहते हैं यहां
खासी समुदाय (Khasi Tribes) से जुड़े गांव मौलिन्नोंग में तकरीबन 95 परिवार के 500 लोग रहते हैं। गांव को सुंदर बनाने के लिए यहां के लोगों ने सड़कों को फूलों के पेड़ों से सजाया है। हालांकि, 2003 के पहले तक यहां सड़कें नहीं थीं, जिससे कोई सैलानी भी घूमने नहीं आता था, लेकिन जब इसे डिस्कवरी इंडिया मैगजीन ने सबसे क्लीन गांव का दर्जा दिया, तब यहां सड़कें भी बन गईं और घूमने के लिए सैलानी भी पहुंचने लगे।
बचपन से स्वच्छता की सीख
मौलिन्नोंग के लोग स्वच्छता को बहुत महत्व देते हैं। दरअसल, इस गांव में 4 साल की उम्र से ही बच्चों को साफ-सफाई की शिक्षा दी जाने लगती है। यहां के लोग अपने घरों के आसपास के क्षेत्र को साफ-सुथरा रखने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। यहां के लोग अपने घरों के बाहर कचरा फेंकने या पान मसाला थूकने पर जुर्माना भरते हैं।
क्या है स्वच्छता का कारण
मौलिन्नोंग की स्वच्छता के पीछे कई कारण हैं। सबसे पहले, इस गांव के लोग स्वच्छता के प्रति जागरूक हैं। यहां के लोग अपने घरों के आसपास के क्षेत्र को साफ-सुथरा रखने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। इस गांव में प्लास्टिक की थैलियों और अन्य प्लास्टिक उत्पादों पर प्रतिबंध है। खास बात यह है कि इस गांव में एक स्वच्छता समिति है, जो गांव में स्वच्छता का काम देखती है।
यहां के खूबसूरत डेस्टिनेशन
इसी के साथ यहां टूरिस्ट्स के लिए कई अमेंजिग स्पॉट हैं, जैसे वाटरफॉल, लिविंग रूट ब्रिज (पेड़ों की जड़ों से बने ब्रिज) और बैलेंसिंग रॉक्स (ये पहाड़ियों के बीच ऐसे रॉक होते हैं, जिससे आने-जाने के लिए संतुलन बना रहता है) भी हैं। ये यहां आने वाले लोगों के लिए आकर्षण के केंद्र हैं। ये गांव झरना, ट्रैक, लिविंग रूट ब्रिज, डॉकी नदी के लिए मशहूर है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता देखते ही बनती है। इस गांव में कई रंग-बिरंगें फूलों के गार्डन भी हैं, जो यहां की खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं।

