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JHARKHAND HEALTH NEWS: आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना की समीक्षा, जानें क्या कहा NHA के मुख्य वित्तीय पदाधिकारी ने

ट्रीटमेंट पैकेज, री-एडमिशन और एआई से निगरानी पर फोकस

by Vivek Sharma
RANCHI: झारखंड में आयुष्मान भारत–मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना की समीक्षा, पोर्टेबिलिटी, पैकेज उपयोग, री-एडमिशन और एआई निगरानी पर फोकस।
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RANCHI: राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) नई दिल्ली के मुख्य वित्तीय पदाधिकारी गयासुद्दीन अहमद ने सोमवार को झारखंड सरकार द्वारा संचालित आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना की समीक्षा की। इस दौरान झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी अध्यक्ष छवि रंजन, महाप्रबंधक प्रवीण चंद्र मिश्रा, वरिष्ठ परामर्शी सुनील प्रसाद सिंह, विश्वजीत प्रसाद और वैभव राय सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इस दौरान गयासुद्दीन अहमद ने केंद्र और राज्य के बीच समन्वय, आईटी सिस्टम को मजबूत करने और निगरानी तंत्र को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।

पैकेज से गंभीर बीमारी का इलाज

समीक्षा बैठक में योजना की प्रगति, वित्तीय स्थिति, तकनीकी व्यवस्था और निगरानी को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यकारी निदेशक छवि रंजन ने बताया कि झारखंड में 66 लाख परिवार आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना से कवर है। वहीं 2.80 करोड़ लाभुक है। जिन्हें निःशुल्क चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में बड़ी संख्या में सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल सूचीबद्ध हैं। जहां पैकेज के माध्यम से गंभीर से गंभीर बीमारियों का इलाज संभव हो पाया है।

इलाज को दूसरे राज्य जाते है मरीज

बैठक के दौरान पोर्टेबिलिटी से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें यह सामने आया कि झारखंड के मरीज इलाज के लिए किन राज्यों में अधिक जाते हैं, किन अस्पतालों में बाह्य-राज्य मरीजों का दबाव ज्यादा है और कौन से उपचार पैकेजों में पोर्टेबिलिटी के मामले सबसे अधिक हैं। प्राइवेट हॉस्पिटलों में बीमारियों के हिसाब से पैकेज उपयोग की समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि कुछ विशिष्ट बीमारियों में दावों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। वहीं सरकारी हॉस्पिटलों में जिलावार पैकेज उपयोग की स्थिति का विश्लेषण करते हुए उन जिलों की पहचान की गई, जहां स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ करने की जरूरत है। जिससे कि वहां के मरीजों को इलाज के लिए अन्य राज्यों में न जाना पड़े। बैठक में 30 दिनों के भीतर मरीजों के री-एडमिशन से जुड़े मामलों पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

एआई से की जा रही निगरानी

टेक्निकल सिस्टम और डेटा मैनेजमेंट पर चर्चा करते हुए बताया गया कि टीएमएस और स्टेट डेटा वेयरहाउस से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी के माध्यम से संदिग्ध दावों और संभावित दुरुपयोग की पहचान की जा रही है। चालू वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार से 275 करोड़ रुपये तथा केंद्र सरकार से 178 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हो चुकी है। जिससे दावों के समयबद्ध भुगतान और योजना के सुचारु संचालन को मजबूती मिली है।

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