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चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग : दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करने वाला भारत बना दुनिया का पहला देश

by Rakesh Pandey
चंद्रयान-3 के प्रज्ञान रोवर को निष्क्रिय किया गया
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सेंट्रल डेस्क,नई दिल्ली/चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग :  बुधवार की शाम 6 बजकर चार मिनट पर चंद्रयान-3 का लैंडर मॉड्यूल (एलएम) चंद्रमा की सतह पर उतर गया। लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) से युक्त लैंडर मॉड्यूल ने शाम छह बजकर चार मिनट पर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र पर सॉफ्ट लैंडिंग की। इसके साथ ही भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश भी बन गया।

चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग

चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग

भारत के साथ ही पूरी दुनिया इस ऐतिहासिक पल का टकटकी लगाए इंतजार कर रही थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मिशन को दक्षिण अफ्रीका से लाइव देख रहे थे। प्रधानमंत्री 15वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए जोहान्सबर्ग में हैं। वे वहीं से लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए इस अनमोल पल के गवाह बन रहे थे। इसरो की सफलता पर उन्होंने कहा कि ये विकसित भारत का क्षण है।

चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग

चंदा मामा दूर के नहीं बस एक टूर के हैं :

प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्रो मोदी ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि ”मेरे प्यारे परिवारजनो! जब हम अपनी आंखों के सामने ऐसा इतिहास बनते हुए देखते हैं तो गर्व होता है। ऐसी ऐतिहासिक घटनाएं राष्ट्र जीवन की चेतना बन जाती हैं। यह पल अविस्मरणीय है। यह क्षण अभूतपूर्व है।

यह क्षण विकसित भारत के शंखनाद का है। यह क्षण नए भारत के जयघोष का है। यह क्षण मुश्किलों के महासागर को पार करने का है। यह क्षण जीत के चंद्रपथ पर चलने का है। यह क्षण 140 करोड़ धड़कनों के सामर्थ्य का है। यह क्षण भारत की नई ऊर्जा व नई चेतना का है। यह क्षण भारत के उदीयमान भाग्य के आह्वान का है। अमृतकाल की प्रथम प्रभा में सफलता की अमृत वर्षा हुई है। हमने धरती पर संकल्प लिया और चांद पर उसे साकार किया।

”अंतरिक्ष में नए भारत की नई उड़ान के साक्षी बने उन्होंने कहा, ”आज हम अंतरिक्ष में नए भारत की नई उड़ान के साक्षी बने हैं। हर घर में उत्सव शुरू हो गया है। हृदय से मैं भी अपने देशवासियों के साथ अपने परिवारजनों के साथ इस उमंग और उल्लास से जुड़ा हुआ हूं. मैं टीम चंद्रयान को, इसरो को और देश के सभी वैज्ञानिकों को जी-जान से बहुत-बहुत बधाई देता हूं जिन्होंने इस क्षण के लिए वर्षों से इतना परिश्रम किया।

हमारे वैज्ञानिकों के परिश्रम से भारत उस दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचा है, जहां आज तक दुनिया का कोई भी देश नहीं पहुंच सका है। आज के बाद से चांद से जुड़े मिथक बदल जाएंगे, कथानक भी बदल जाएंगे और नई पीढ़ी के लिए कहावतें भी बदल जाएंगी। भारत में तो हम सभी लोग धरती को मां कहते हैं और चांद को मामा बुलाते हैं। कभी कहा जाता था कि चंदा मामा बहुत दूर के हैं, अब एक दिन वो भी आएगा, जब बच्चे कहा करेंगे कि चंदा मामा बस एक टूर के हैं। ”———

2019 में भेजे गये चंद्रयान-2 से भारत के वैज्ञानिकों ने सबक लिया चंद्रयान-3 से पहले 22 जुलाई 2019 को चंद्रयान-2 लांच करने की कोशिश की गयी थी। हालांकि, चंद्रयान-2 मिशन का विक्रम चंद्र लैंडर छह सितंबर 2019 को चंद्रमा पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। यह चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र पर सॉफ्ट लैंडिंग की कोशिश करने वाला किसी भी देश का पहला अंतरिक्ष मिशन था।

इसरो के वैज्ञानिकों ने मिशन से भी काफी कुछ सीखा। इसरो के प्रमुख एस. सोमनाथ कहते हैं कि 2019 का मिशन चंद्रयान-2 आंशिक सफल था, लेकिन इससे मिले अनुभव इसरो के चंद्रमा पर लैंडर उतारने के लिए काफी उपयोगी साबित हुए. इसी के तहत चंद्रयान-3 में कई बदलाव किए गए. जिसमें एल्गोरिदम को बेहतर करने, लैंडर में पांच की जगह चार इंजन लगाने, लैंडर के पांव पहले के मुकाबले मजबूत बनाने, लैंडिग का क्षेत्रफल बढ़ाने जैसे कई बदलाव किये गये थे।

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