नेशनल डेस्क,बेंगलुरु : बेंगलुरु इन दिनों पानी के भीषण संकट (Bengaluru Water Crisis) से जूझ रहा है। जल संकट की वजह से यहां के लोगों का जीवन मुश्किल में पड़ गया है। बेंगलुरु के लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पानी की किल्लत से निजात पाने के लिए लोग रीसाइक्लिंग के तरीकों को भी अपना रहे हैं।

जरूरत के मुताबिक नहीं मिल रहे पानी के टैंकर
बाबूसपाल्या के रहने वाले एक शख्स मे कहा है, “हमें रोजाना पानी के चार टैंकरों की जरूरत है। हमें केवल एक या दो ही टैंकर मिल रहे हैं। हम पिछले दो-तीन महीनों से भारी समस्याओं से जूझ रहे हैं।” सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए कई फैसले लिए हैं। यहां जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड (बीडब्ल्यूएसएसबी) ने गैर-जरूरी उद्देश्यों के लिए पेयजल के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है और इस आदेश का उल्लंघन करने वालों पर 5,000 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा।
बीडब्ल्यूएसएसबी ने कहा कि सभी के लिए पेयजल की आपूर्ति आवश्यक है। उसने कहा कि शहर में तापमान रोजाना बढ़ रहा है और हाल के दिनों में बारिश की कमी के कारण भूजल स्तर में गिरावट आई है, इसलिए बेंगलुरु शहर में पानी की बर्बादी को रोकना जरूरी है।
बोरवेल खोदने से पहले लेना होगा परमिशन (Bengaluru Water Crisis)
बीडब्ल्यूएसएसबी ने एक आदेश में कहा कि बेंगलुरु शहर में बोरवेल खोदने से पहले कर्नाटक भूजल (प्रबंधन और विकास का विनियमन और नियंत्रण) अधिनियम, 2011 की धारा 11 के अनुसार संबंधित अधिकारियों से अनुमति लेना अनिवार्य है। आदेश के अनुसार, बोरवेल केवल उन स्थानों पर ही खोदे जाएं, जहां संबंधित अधिकारियों द्वारा अनुमति दी गई हो और यदि अनाधिकृत स्थानों पर ऐसा किया जाता है, तो नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
स्विमिंग पूल में पीने का पानी नहीं होगा इस्तेमाल
बेंगलुरु वाटर सप्लाई बोर्ड ने पीने के पानी का स्विमिंग पूल में इस्तेमाल करने पर बैन लगा दिया है। बोर्ड ने कहा कि नियम का पालन नहीं करने पर 5 हजार रुपए का जुर्माना लगेगा। इससे पहले पीने लायक पानी का इस्तेमाल कार धोने, कपड़े धोने या पौधों में डालने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसे न मानने पर 5 हजार रुपए जुर्माने का प्रावधान है।
IT कंपनियों के लिए वर्क फ्रॉम होम की मांग
सोशल मीडिया पर लोग राज्य के CM सिद्धारमैया से IT कंपनियों के लिए वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य करने की गुहार लगा रहे हैं, ताकि शहर में या उसके बाहर घर जाकर इस परेशानी से निजात पा सकें। कोचिंग सेंटर्स और स्कूलों ने बच्चों को स्कूल आने की बजाय घर से ही क्लास लेने की सलाह दी है।
तीन-चार दशक में इतना भीषण सूखा नहीं देखा
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने जल संकट पर लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य में पिछले तीन-चार दशक में इतना भीषण सूखा नहीं देखा गया और आगामी दो महीने बेहद अहम हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन इस संकट से निपटने और नागरिकों को पानी की आपूर्ति के लिए सभी प्रयास कर रहा है और शहर में जल माफिया को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए गए हैं।
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