– शिखर सम्मान से सम्मानित हुए फिल्म अभिनेता कुणाल सिंह

– भोजपुरी की पहली साइंस फिल्म ‘मद्धिम’ का हुआ प्रदर्शन
भाषा को अगर बहुत जकड़ना चाहेंगे तो वह बालू की तरह फिसल जाएगी : चंदन पांडेय
गोरखपुर : Bhojpuri Film Actor Kunal Singh: भोजपुरी भाषा के सम्मान, स्वाभिमान और संरक्षण को समर्पित ‘यायावरी भोजपुरी महोत्सव’ का आयोजन रविवार को गोरखपुर के गोकुल अतिथि भवन में किया गया। महोत्सव में भोजपुरी फिल्म अभिनेता कुणाल सिंह को तीसरे ‘यायावरी शिखर सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
झारखंड के पूर्व सूचना आयुक्त बैजनाथ मिश्र विशिष्ट अतिथि के रुप में उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भोजपुरी हमारी मातृभाषा है। इस पर हमें गर्व होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आने वाली जनगणना के दौरान हम सबको मातृभाषा कॉलम में भोजपुरी का उल्लेख करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई बार हिंदी और भोजपुरी के बीच विवाद खड़ा करने का प्रयास किया जाता है, यह ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि भोजपुरी के कमजोर होने से हिंदी भी कमजोर होगी। भोजपुरी को कमजोर करके हिंदी मजबूत नहीं हो सकती है।
Bhojpuri Film Actor Kunal Singh: आठ सत्रों में आयोजित हुआ महोत्सव
भोजपुरी महोत्सव आठ सत्रों में आयोजित किया गया। समारोह का पहला सत्र उद्घाटन सत्र रहा। दूसरा सत्र ‘भोजपुरिया एलिट के माई भाषा से नेह छोह पर’ केंद्रित रही। इस दौरान आईपीएस अधिकारी एवं कवि सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज और संजय शेफर्ड के बीच चर्चा हुई। सत्यार्थ अनिरुद्ध ने कहा कि भोजपुरी के विकास के लिए अलग-अलग स्तर पर प्रयास करने की आवश्यकता है। छोटे-छोटे संगठन बनाकर और जिम्मेदारियां देकर हम बहुत कुछ बेहतर कर सकते हैं। उन्होंने यह विमर्श रखा कि भोजपुरी के विकास के लिए क्या हिंदी से लड़ने की जरूरत है या दोनों एक दूसरे के साथ रहकर बड़ी और छोटी बहन की तरह विकसित और पल्लवित हो सकती हैं।
तीसरे सत्र में ‘भोजपुरी कथा संसार आ पलायन के सोक गीत पर’ विनिता परमार, प्रवीण कुमार, गौतम चौबे और धनंजय सिंह के बीच परिचर्चा हुई। लेखकों ने कहा कि भोजपुरी को अपना पाठक वर्ग तैयार करने की आवश्यकता है।
चौथे सत्र में ‘भोजपुरी किताब के दुनिया : लेखक, प्रकाशक आ पाठक के संबंध’ पर विमल चंद्र पांडेय, चंदन पांडेय, सत्य व्यास और केशव मोहन पांडेय ने विमर्श किया। चंदन पांडेय ने अपने संबोधन में कहा कि भाषा को जकड़ने की नहीं पकड़ने की जरूरत है। भाषा बिल्कुल बालू की तरह होती है, अगर उसे जैक करने का प्रयास किया जाएगा तो वह वह बंधन से बाहर निकल जाती है
। अतीत का गौरव करने के साथ-साथ नवीनता को आत्मसात कर भोजपुरी विकसित हो सकती है। सत्य व्यास ने कहा कि भोजपुरी 22 करोड़ लोगों की भाषा है, लेकिन भोजपुरी की किताब प्रकाशित करने वाले प्रकाशकों को पर्याप्त मात्रा में पाठक वर्ग नहीं मिल पा रहे हैं, यह बेहद चिंता की बात है। केशव मोहन ने कहा कि अगर एक निश्चित संख्या बल प्रकाशकों को मिल जाए तो वह निश्चित रूप से भोजपुरी की अधिक से अधिक किताबें का प्रकाशन करेंगे।

पांचवें सत्र में ‘अकादमिक भोजपुरी से नवकी पौध के नेह पर’ डॉ. क्षमा त्रिपाठी, प्रमोद तिवारी, आनंद कीर्ति तिवारी और ब्रजभूषण मिश्र ने सार्थक चर्चा की। इस दौरान बिहार और उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालय में भोजपुरी भाषा की पढ़ाई और इसके इतिहास पर चर्चा हुई। कहा गया कि इसको आगे बढ़ाने के लिए सरकारी स्तर पर प्रयास करने की आवश्यकता है।
छठवां सत्र ‘भोजपुरिया खाद से फलत-फुलात बॉलीवुड’ रहा। इसमें डॉ. एम के पांडेय ने ‘पंचायत’ फेम अशोक पाठक से बातचीत की। इस दौरान फिल्म इंडस्ट्री में भोजपुरी अभिनेताओं और कलाकारों की उपस्थित को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। अशोक पांडेय ने अपनी फिल्म करियर और पंचायत वेब सीरीज में अपनी भूमिका पर बात की।
सातवें सत्र में भोजपुरी के पहले साइंस फिक्शन फिल्म ‘मद्धिम’ का प्रदर्शन किया गया।
महोत्सव का अंतिम सत्र सांस्कृतिक संध्या को समर्पित रहा। इसमें राकेश कुमार का लौंडा डांस, सिसोदिया सिस्टर्स, शालिनी दुबे, आदित्य राजन और अनन्या सिंह का गायन आकर्षण के केंद्र रहे। महोत्सव के आयोजन समन्वयक गौरव मणि त्रिपाठी ने बताया कि महोत्सव में आए लोगों ने हमें खूब स्नेह एवं प्रेम दिया है।

