RANCHI: पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में आयोजित 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के साथ कथित तौर पर हुए व्यवहार को लेकर झारखंड में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री सह नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सह सांसद आदित्य साहू ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला है।
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दार्जिलिंग में आयोजित सम्मेलन के दौरान संथाल आदिवासी समाज की बेटी और देश की राष्ट्रपति के साथ पश्चिम बंगाल सरकार का व्यवहार अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति के प्रति इस तरह का रवैया न केवल प्रोटोकॉल का उल्लंघन है, बल्कि इससे आदिवासी समाज की भावनाएं भी आहत हुई हैं।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के शब्दों में जो पीड़ा और असहजता दिखाई दी, उसे पूरे देश ने महसूस किया। उन्होंने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीति अपनी जगह है, लेकिन राष्ट्र के सर्वोच्च पद और उससे जुड़े प्रोटोकॉल का सम्मान करना हर राज्य सरकार की जिम्मेदारी होती है। उनके अनुसार सत्ता के अहंकार में राष्ट्रपति पद की गरिमा और संथाल आदिवासी समाज का अपमान किया गया है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने भी इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का अपमान पूरे राष्ट्र का अपमान है। यह जनजातीय समाज की गरिमा, संस्कृति और परंपरा का भी अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने राजनीतिक मर्यादाओं को तोड़ते हुए संवैधानिक प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया। उन्होंने कहा कि आजाद भारत के इतिहास में इस तरह का व्यवहार पहले कभी देखने को नहीं मिला।
प्रदेश अध्यक्ष ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जो खुद को आदिवासी समाज का अगुवा बताते हैं, वे संथाल समाज की बेटी और देश की राष्ट्रपति के अपमान के मुद्दे पर अब तक मौन क्यों हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड का जनजातीय समाज इस तरह की घटना को कभी बर्दाश्त नहीं करेगा।

