CHAIBASA : पश्चिमी सिंहभूम जिले में पागल पागल हाथी के खूनी खेल की वजह से वन विभाग की किरकिरी हो रही है। वन विभाग अब तक हाथी को खोज नहीं पाया है। 19 मौत के बाद वन विभाग कह रहा है कि वह अलर्ट मोड पर है। झुंड से बिछड़े दंतैल जंगली हाथी द्वारा पिछले सात दिनों तक मचाए गए कहर के बाद आठवें दिन अब तक किसी भी जान-माल का नुकसान नहीं हुआ है। इससे ग्रामीणों और प्रशासन ने राहत की सांस ली है। हालांकि खतरा पूरी तरह टला नहीं है। इससे ग्रामीणों में भय अभी भी थमा नहीं है। लगातार क्षेत्र के ग्रामीण पलायन कर रहे हैं।
आठ दिनों में 19 लोगों की गई जान, गांवों में दहशत का माहौल
पश्चिमी सिंहभूम जिला में पिछले एक सप्ताह के दौरान हाथी ने विभिन्न गांवों में रात्रि में अचानक हमला कर 18 ग्रामीणों की जान ले ली। इसमें हाथी के द्वारा घायल एक महिला की इलाज के दौरान चाईबासा सदर अस्पताल में बुधवार की रात मौत हो गई है। मृतका हाटगम्हरिया के सीलजोडा गांव निवासी 35 वर्षीय चिपरी हेंब्रम हैं। उसके बेटे मारतुम हेंब्रम को हाथी की चपेट में आ कर जख्मी होने से सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लगातार हो रही घटनाओं के कारण लोग शाम होते ही घरों में दुबकने को मजबूर हैं और कई गांवों में अघोषित कर्फ्यू जैसी स्थिति बन गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि हाथी बिना किसी उकसावे के हमला कर रहा है, जिससे महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सबसे अधिक भयभीत हैं।
हालांकि प्रशासन मानता है कि जब तक हाथी को पूरी तरह नियंत्रित कर सुरक्षित वन क्षेत्र में नहीं भेजा जाता, तब तक स्थिति सामान्य नहीं कही जा सकती। वन विभाग की टीमें 24 घंटे निगरानी में जुटी हुई हैं और प्रभावित इलाकों में अलर्ट जारी है।
हाथी का रेस्क्यू करने वन तारा से आ रही टीम
हाथी को काबू में करने और उसे सुरक्षित वन क्षेत्र में पहुंचाने के लिए वन विभाग ने बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया है। इस संबंध में RCCF स्मिता पंकज ने बताया कि झुंड से बिछड़े हाथी को नियंत्रित करने के लिए वन तारा से विशेष प्रशिक्षित टीमों को बुलाया जा रहा है।
उन्होंने जानकारी दी कि पश्चिम बंगाल से प्रशिक्षित वनकर्मी दल, ओडिशा से हाथी प्रबंधन में दक्ष विशेषज्ञ रेस्क्यू टीम को तैनात करने की प्रक्रिया जारी है, ताकि हाथी को सुरक्षित स्थान पर भेजा जा सके। उन्होंने ग्रामीणों को सतर्क रहने की अपील
वन विभाग द्वारा प्रभावित गांवों में लगातार माइक से लोगों को सतर्क किया जा रहा है। ग्रामीणों से कहा गया है कि वे रात में घरों से बाहर न निकलें, सुबह अंधेरे में शौच या खेत की ओर न जाएं और किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना प्रशासन को दें। वन विभाग की टीमें ड्रोन कैमरों और अन्य तकनीकी संसाधनों की मदद से हाथी की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। अधिकारी लगातार जंगल और गांवों के बीच के इलाकों में गश्त कर रहे हैं। विभाग का कहना है कि हाथी अभी भी क्षेत्र में मौजूद हैं, इसलिए पूरी सतर्कता बरती जा रही है।

