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Chatra Crime : चतरा DSP व दो थाना प्रभारियों को हाई कोर्ट में सशरीर किया गया तलब

मैट्रिक के छात्रों को अवैध रूप से हिरासत में रखने का मामला

by Mujtaba Haider Rizvi
Chatra DSP High Court Summons
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  • अगली तारीख पर IO को केस डायरी पेश करने का आदेश

Chatra : झारखंड हाई कोर्ट ने सोमवार को एक सुनवाई के दौरान मैट्रिक के छात्र को अवैध रूप से हिरासत में रखने के मामले में चतरा के डीएसपी को कोर्ट में सशरीर तलब कर लिया है। डीएसपी के अलावा लावालौंग और टंडवा के थाना प्रभारियों को भी सशरीर कोर्ट में आने का आदेश दिया गया है। इन तीनों को मामले की अगली तारीख 13 फरवरी को हाई कोर्ट में पेश होना है।

गौरतलब है कि झारखंड हाईकोर्ट ने मैट्रिक छात्र को अवैध रूप से हिरासत में रखने के मामले की सुनवाई की। एसपी इस मामले में ऑनलाइन हाजिर हुए। अदालत ने एसपी से मामले की केस डायरी पढ़कर सुनाने को कहा। केस डायरी में मैट्रिक की छात्रा से 27 और 30 जनवरी को हुई पूछताछ का जिक्र मिला।

हाईकोर्ट ने केस के आईओ को भी निर्देश दिया है कि वह अगली तारीख 13 फरवरी को केस डायरी के साथ कोर्ट में हाजिर हों।

मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और एके राय की खंडपीठ ने की। चतरा डीएसपी और लावालौंग व टंडवा थाना प्रभारी के मोबाइल पहली पाली की सुनवाई में जब्त कर लिए गए थे।

दोनों थाना प्रभारियों को कोर्ट रूम में बैठने का आदेश दिया गया था। बाद में उनके मोबाइल लौटा दिए गए और अगली सुनवाई में उन्हें सशरीर उपस्थित रहने को कहा गया है। कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों से पूछा कि 26 जनवरी की रात 2:00 बजे छात्रों को क्यों उठाया गया और अगर उठाया भी गया तो पूछताछ के बाद तुरंत उन्हें क्यों नहीं छोड़ा गया। 10 दिन तक अवैध रूप से क्यों हिरासत में रखा गया। कोर्ट का कहना था कि जब एक मामले में टंडवा थाना में केस दर्ज है और उसी संबंधित मामले में पूछताछ के लिए छात्रों को उठाया गया है तो क्या केस डायरी में इसका जिक्र किया गया है।

इस पर डीएसपी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि स्टेशन डायरी में इस संबंध में लिखा गया है। इसके बाद कोर्ट ने मोबाइल पर चतरा एसपी से बात की और केस डायरी के बारे में जानकारी ली।

कोर्ट ने पुलिस से पूछा है कि केस डायरी में इन बच्चों को हिरासत में लेकर पूछताछ करने के संबंध में जिक्र है या नहीं। इस मामले में याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता भास्कर त्रिवेदी, विपिन बिहारी और प्रियांशु निलेश पक्ष रख रहे हैं। वहीं सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार ने दलील पेश की।

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