चतरा : झारखंड के चतरा जिले के पत्थलगडा प्रखंड के सिंघानी गांव में समाज को झकझोर देने वाली घटना देखने को मिली, जब एक बुजुर्ग पिता के निधन पर उनकी तीन बेटियों ने अर्थी को कंधा देकर बेटे का फर्ज निभाया। यह घटना समाज में बेटियों के बढ़ते कदमों और उनकी भूमिका को दर्शाती है।

बेटियों ने निभाई अंतिम विदाई की जिम्मेदारी
महावीर बैठा नामक बुजुर्ग के परिवार में कोई बेटा नहीं था। जब उनके निधन के बाद अर्थी को कंधा देने के लिए कोई सामने नहीं आया, तो उनकी तीन बेटियां – शकुंतला देवी, दीप्ति देवी और डिंपल देवी ने न केवल अर्थी को कंधा दिया बल्कि पूरे अंतिम संस्कार में बढ़-चढ़कर भाग लिया।
गांव वालों ने की बेटियों के साहस की सराहना
जब बेटियां आगे आईं, तो उनकी भतीजी, अन्य महिलाएं और ग्रामीण भी उनका साथ देने पहुंचे। दिवंगत के भतीजे वशिष्ठ रजक ने मुखाग्नि दी। इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल ग्रामीणों का दिल छू लिया बल्कि यह भी साबित किया कि बेटियां बेटों से कम नहीं हैं।
परंपराओं में बदलाव का संकेत
गांव समाज में अंतिम संस्कार और कर्मकांड जैसे कार्य पुरुषों का वर्चस्व माना जाता रहा है। लेकिन इस घटना ने यह संदेश दिया कि समाज की पुरानी धारणाओं को बदलने का वक्त आ चुका है।

