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Earthquake In Jharkhand : दुमका-देवघर और गोड्डा में भूकंप के झटके

by Rakesh Pandey
Earthquake In Jharkhand
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दुमका  : Earthquake In Jharkhand : झारखंड की उपराजधानी दुमका में सोमवार की देर 12.39 बजे तेज गड़गड़ाहट के साथ भूकंप के झटके  महसूस किए गए। दुमका के अलावा देवघर और गोड्डा जिले में भी धरती डोली। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.3 मापी गई।

भूकंप का केंद्र दुमका के रामगढ़ प्रखंड बताया गया है। इसकी गहराई पृथ्वी तल से पांच किलोमीटर नीचे आंकी गई है। दुमका के सरैयाहाट, हंसडीहा, रामगढ़ और जरमुंडी के लोगों ने भूकंप के झटके का एहसास किया। हालांकि इससे जानमाल की नुकसान की सूचना नहीं है। इधर, भूकंप के झटके लगने के बाद बड़ी संख्या में लोग घरों से बाहर निकल आए। कुछ देर तक दहशत में रहे लेकिन बाद में सब कुछ सामान्य हो गया। भूकंप के झटका सोमवार की सुबह नौ बजे भी दुमका में महसूस किए गए।

पिछली बार दुमका और साहिबगंज में धरती डोली थी। इत्तेफाक से उस दिन भी मंगलवार के अल सुबह 3.22 बजे ही भूकंप के झटके महसूस किये गये थे। भूकंप के खतरे के दृष्टिकोण से झारखंड को जोन तीन में रखा गया हैं। वहीं, संताल परगना के साहिबगंज को थोड़ा संवेदनशील माना गया है। इसके बावजूद यह इलाका अभी काफी सुरक्षित है। दुमका-साहिबगंज में वर्ष 2015 से अब तक नौ से अधिक बार धरती डोली है।

भू-गर्भ विज्ञानियों के मुताबिक संताल परगना प्रमंडल संताल परगना में भूकंप जोन का रि- मैपिंग कराया जाना चाहिए ताकि समय पर लोगों को प्राकृतिक आपदा से सतर्क किया जा सके। समय-समय पर आपदा प्रबंधन द्वारा माक ड्रिल भी करनी चाहिए। भूकंप आफ्टर शाक भी आ सकते हैं। साहिबगंज राजमहल पूर्णिया फाल्ट पर बसा है।

भू-विज्ञानी डा.रंणजीत सिंह के मुताबिक साहिबगंज में राजमहल की पहाड़ियां फैली हुई हैं।  इसके फासिल्स के आधार पर प्लेट टेक्टोनिक्स की थ्योरी को स्थापित करने में मदद मिलती है। साथ ही फासिल्स की सहायता से यह बताया जा सकता है की वर्तमान की कौन-सी प्लेट्स अतीत में किस कालखंड तक एक साथ थीं।

डा.रणजीत के मुताबिक पृथ्वी की ऊपरी सतह सात टेक्टोनिक प्लेटों से मिकलर बना है। जहां भी ये प्लेटें एक-दूसरे से टकराती है वहां भूकंप का खतरा पैदा होता है। जब ये प्लेटें एक दूसरे के क्षेत्रों में घुसने की कोशिश करती हैं तो एक-दूसरे से रगड़ खाती है जिससे अपार ऊर्जा निकलती है और उस घर्षण या फ्रिक्शन से ऊपर की धरती डोलने लगती है। इस दौरान कई बार धरती फट जाती है। कई बार कई महीनों तक भूकंप आते हैं। यह ऊर्जा रह रह कर बाहर निकलती है और इन्हें आफ्टर शाक कहते हैं।

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