रांची : झारखंड सरकार ने पूर्वी सिंहभूम जिले के भू-अर्जन विभाग द्वारा किए गए मुआवजा भुगतान से जुड़े पुराने मामले में विभागीय जांच दोबारा शुरू करने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई जल संसाधन विभाग के संकल्प के तहत की गई है। सुवर्णरेखा परियोजना आदित्यपुर से इस संबंध में आरोप पत्र दिए गए थे।मामले में दो बिंदुओं पर अनियमितता की जांच की जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, पूर्वी सिंहभूम जिले के घाघीडीह क्षेत्र में खरकई बराज से निकलने वाली दाहिनी मुख्य नहर निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान मुआवजा भुगतान में गड़बड़ी की शिकायत सामने आई थी। जांच में यह आरोप है कि एक मामले में 0.77 एकड़ भूमि का मुआवजा भुगतान होने के बाद संबंधित राशि अवैध रूप से खाते से निकाली गई। दूसरे मामले में जुगसलाई गौरक्षी गौशाला की 1.42 एकड़ खतियानी भूमि के लिए फर्जी एकरारनामा और गलत दखल प्रतिवेदन के आधार पर करीब 1.73 करोड़ रुपये के भुगतान का प्रयास किया गया था। इसी कथित गड़बड़ी की विस्तृत जांच कराई जा रही है।
पहले विभागीय जांच पदाधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में आरोपों को प्रमाणित नहीं माना था, लेकिन सरकार की समीक्षा में पाया गया कि जांच के दौरान दस्तावेजी साक्ष्यों को विधिवत एक्ज़िबिट नहीं किया गया और संबंधित गवाहों का परीक्षण तथा प्रतिपरीक्षण भी नहीं कराया गया। इसी कारण झारखंड सरकारी सेवक नियमावली 2016 के तहत पुनः जांच का आदेश दिया गया है।
राज्यपाल के आदेश से सुनील कुमार को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया है। इस मामले में तत्कालीन विशेष भू अर्जन पदाधिकारी मानगो शिविर, आदित्यपुर लखीराम बास्के को जांच में उपस्थित होकर दस्तावेजी साक्ष्यों और गवाहों की प्रक्रिया में शामिल होने का निर्देश दिया गया है। उनसे लिखित जवाब मांगा गया।

