रांची: झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और कोयला मंत्री किशन रेड्डी से मुलाकात की। इस दौरान, उन्होंने राज्य के कोयला उत्खनन क्षेत्र में 1.36 लाख करोड़ रुपये के बकाए की राशि के भुगतान के लिए केंद्र से लिखित अनुरोध किया। उन्होंने लिखा है कि हमारे राज्य में सूखा पड़ने के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था काफी कमजोर हो चुकी है। ऐसे में हमारी सरकार आधी आबादी के सशक्तिकरण, कृषि क्षेत्र और दूध उत्पादन, मछली पालन, पशुपालन और बागवानी की योजना बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना चाहती है। उन्होंने कहा कि झारखंड के समुचित विकास के लिए 1.36 लाख करोड़ रुपये की बकाया राशि की उपलब्धता से राज्य को मदद मिलेगी।
राजस्व का मुख्य स्रोत खान-खनिज
उन्होंने वित्त मंत्री को दिए पत्र में लिखा है कि झारखण्ड खनिज संपदाओं का प्रदेश है। राज्य के राजस्व की निर्भरता का मुख्य स्रोत खान-खनिज है। कोल माइनिंग से लगभग 70-80% राजस्व की प्राप्ति होती है। ज्ञातव्य है कि कोल उत्खनन प्रक्षेत्र में धुले कोयले की रॉयल्टी का बकाया 2900 करोड़, किसी भी कंपनी की पर्यावरण मंजूरी सीमा तक पहुंच में उत्खनित खनिज की कीमत पर बकाया 32,000 करोड़ और भूमि अधिग्रहण संबंधी बकाया 1.01,142 करोड़ है। कुल मिलाकर 1,36,042 करोड़ बकाया है।
केंद्र से मिलने वाला अनुदान घटा
झारखंड राज्य के लिए आर्थिक सहायता के संदर्भ में स्मार पत्र में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बताया कि राज्य का गठन 2000 में हुआ था। लेकिन उसके बाद से सामाजिक-आर्थिक विकास की दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं हो पाई है। इसके अलावा केंद्र सरकार के द्वारा झारखण्ड को प्राप्त होने वाली सहायता अनुदान की राशि में वर्ष-वार कमी होती गयी है। 2019-20 में 12302.67 करोड़ रुपये, वर्ष 2020-21 में 11993.31 करोड़ रुपये, वर्ष 2021-22 में 10666.85 करोड़ रुपये, 2022-23 में 10893.54 करोड़ रुपये, 2023-24 में 9146.26 करोड़ और 2024-25 में 16961.35 करोड़ की राशि के विरुद्ध दिसंबर 2024 तक झारखण्ड को मात्र 4808.89 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए।
सीएम ने भी लिखा था पीएम को पत्र
पत्र में ये भी बताया गया है कि झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 23.09.2024 को पत्र के माध्यम से प्रधानमंत्री से बकाया राशि के भुगतान के लिए संबंधित विभाग को निर्देश देने का आग्रह किया था। इसलिए कोल कंपनी द्वारा 1,36,042 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने की दिशा में शीघ्र कार्रवाई की जाए। इसके अतिरिक्त वर्ष 2024-25 में झारखण्ड राज्य के लिए सहायता अनुदान अनुमानित निर्धारित लक्ष्य 16961.35 करोड़ की शेष राशि 12152.46 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने की कृपा की जाए।
टीम गठित करने का निर्देश
इसके बाद केंद्रीय कोयला मंत्री किशन रेड्डी ने कोयला मंत्रालय की अपर सचिव स्मिता प्रधान को निर्देश दिया कि वे झारखंड और केंद्र सरकार के खनन मंत्रालय के अधिकारियों की एक टीम गठित करें। इस टीम को बकाए की सही राशि की गणना करने के लिए एक बैठक आयोजित करने की जिम्मेदारी दी गई, ताकि कोयला उत्खनन से संबंधित झारखंड का बकाया जल्दी से चुकता किया जा सके।

