Chaibasa : लगभग 2 साल तक अपनी मूल-संस्कृति और मूलतः प्राकृतिक आस्था से भटकने के बाद एक परिवार के चार सदस्यों ने रविवार को सरना धर्म में वापसी की है। सरना धर्म में वापसी करने वाले टोटों प्रखंड अंतर्गत मौजा बुंडू के रेंगो टोला में लगभग सोंगा केराई के परिवार के लोग हैं। रविवार को सोंगा केराई की पत्नी 25 वर्षीय सोमवारी कुई, पुत्र पांच वर्षीय सुरेश केराई एवं दो वर्षीय प्रकाश केराई के साथ ग्रामीण मुण्डा, ग्राम के दियुरी एवं आदिवासी हो समाज युवा महासभा के पदाधिकारियों की उपस्थिति में हो समाज की मूल-संस्कृति और प्राकृतिक आस्था में वापसी की है। इस मौके पर हो समाज की परंपरा के मुताबिक लाल मुर्गा काीबलि चढ़ाकर पुजा की शुरुआत की गई। इसके साथ ही परिवार के सभी सदस्यों को जाते-परचि ( शुद्धिकरण ) किया गया। अब सोंग केराई का परिवार हो समाज की सभी रीति-रिवाज पर आस्था रखते हुए समाज के साथ सभी पारंपरिक त्योहार मना सकेंगे।
ग्रामीणों के मुताबिक इस परिवार ने बीमारी ठीक होने के नाम पर दो साल पूर्व ईसाई धर्म अपनाया था। यह लोग तिम्बरा और दुईया स्थित चर्च में हर रविवार को प्रार्थना करने के लिए जाते थे। परंतु धर्म परिवर्त्तन के बाद भी इनकी स्थिति में कोई सुधार नही हुआ। इस पर सोंगा केराई ने सामाजिक स्तर पर स्वयं मूल्यांकन किया और आदिवासी हो समाज युवा महासभा के के जागरूकता अभियान से प्रेरित होकर अपने हो समाज में वापसी का फैसला लिया।
केराई ने आदिवासी हो समाज की मूल-संस्कृति एवं परंपरा में वापस आने के लिए ग्रामीणों के समक्ष स्वयं इच्छा जताई ।इस पर सामाजिक पहल करते हुये आदिवासी हो समाज युवा महासभा के अनुमंडल सांस्कृतिक सचिव सह हो भाषा शिक्षक कृष्णा तोपनो के नेतृत्व में सोंगा केराई के परिवार की वापसी कराई गई।
हो समाज की रीति-रिवाज के अनुसार चारों सदस्यों को धोती-गंजी, साड़ी-गमछा पहनाकर सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में ग्रामीण मुंडा गुनाराम अंगरिया, सहयोगी मुंडा राजेश पुरती, आदिवासी हो समाज युवा महासभा के जिला सचिव ओयबन हेम्ब्रम, जगन्नाथपुर अनुमंडल अध्यक्ष बलराम लागुरी, अनुमंडल कोषाध्यक्ष बाली लागुरी, गालू पुरती, श्रीराम अंगरिया, माधो टोपना, कालीचरण अंगरिया, साधुचरण अगरिया, बुढ़नसिंह अंगरिया सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
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