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Godda Gang Rape Case : नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के तीन आरोपियों को गोड्डा कोर्ट ने भेजा आजीवन कारावास

Jharkhand Hindi News : मेला देखकर घर लौट रही नाबालिग लड़की के साथ तीन युवकों ने रास्ते में सामूहिक दुष्कर्म की घटना को दिया था अंजाम

by Rakesh Pandey
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गोड्डा : झारखंड के गोड्डा जिले में नाबालिग से दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध पर गोड्डा जिला अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए मिसाल कायम करने वाला फैसला सुनाया है। सामूहिक दुष्कर्म के दोषी तीन अभियुक्तों को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा देकर स्पष्ट संदेश दिया है कि ऐसे अपराध बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-प्रथम, गोड्डा की अदालत ने हनवारा थाना क्षेत्र से जुड़े इस मामले में तीनों अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए यह सजा सुनाई है। अदालत के इस निर्णय को महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों पर सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है।

कब हुई थी वारदात

अदालत में प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार, यह मामला 18 नवंबर 2024 का है। हनवारा थाना क्षेत्र की रहने वाली एक नाबालिग लड़की कार्तिक मेला देखकर देर शाम अपने घर लौट रही थी। इसी दौरान तीन युवकों ने रास्ते में उसे रोककर सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। पीड़िता ने हिम्मत दिखाते हुए घटना के बाद हनवारा थाना में तीनों आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

पुलिस की तत्परता से हुई गिरफ्तारी

मामला दर्ज होते ही पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजते हुए कोर्ट के समक्ष पेश किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेजी से पूरी की गई और अभियोजन पक्ष ने अदालत में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए।

कोर्ट ने तीनों को दोषी ठहराया

लंबी सुनवाई के बाद 20 दिसंबर को अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था। इसके बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम की अदालत ने अभियुक्त कुंदन कुमार पासी उर्फ कुंदन कुमार चौधरी, मो. रासीद और मो. जाबिर को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं एवं पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी पाया।

फैसले में क्या बोली अदालत

अपने फैसले में अदालत ने कहा कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध समाज के लिए गंभीर खतरा हैं। ऐसे मामलों में कठोर दंड आवश्यक है, ताकि अपराधियों में कानून का भय बना रहे और पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके। कोर्ट ने यह भी कहा कि पॉक्सो एक्ट के तहत मामलों में सख्ती से कार्रवाई कर समाज को स्पष्ट संदेश देना जरूरी है कि ऐसे अपराध किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।

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