रांची। झारखंड में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर एक बुजुर्ग से 10 लाख रुपये से अधिक की ठगी कर ली गई। मामले में कार्रवाई करते हुए सीआईडी के साइबर अपराध थाना पुलिस ने बिहार के दरभंगा से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान सूरज कुमार चौधरी के रूप में हुई है, जो दरभंगा के कमतौल क्षेत्र का निवासी है। पुलिस ने उसके पास से मामले में इस्तेमाल किए गए सिम कार्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य भी बरामद किए हैं।
वर्दी में नजर आ रहे थे साइबर ठग
पीड़ित रामगढ़ निवासी 75 वर्षीय बुजुर्ग हैं, जिन्होंने 25 फरवरी को साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, ठगों ने खुद को कानून प्रवर्तन एजेंसी का अधिकारी बताते हुए उन्हें वीडियो कॉल किया। इस दौरान आरोपी वर्दी में नजर आए और बुजुर्ग को किसी मामले में फंसाने की धमकी दी। इससे बुजुर्ग डर गए।
ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर उन्हें मानसिक दबाव में लिया और गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में कुल 10 लाख 47 हजार रुपये ट्रांसफर करवा लिए। घटना के बाद पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने पुलिस से संपर्क किया।
सिम कार्ड विक्रेता की भूमिका आई सामने
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने बैंक खातों और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया। इसी क्रम में एक सिम कार्ड विक्रेता की भूमिका सामने आई, जिसे दरभंगा से गिरफ्तार किया गया।
जांच में पाया गया कि आरोपी ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिम कार्ड जारी किया था, जिसका इस्तेमाल इस साइबर ठगी में किया गया। पुलिस का कहना है कि इस गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान की जा रही है और जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार किया जाएगा।
जागरूक बनें, सतर्क रहें
साइबर थाना पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के जरिए पैसे की मांग नहीं करती और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई प्रक्रिया नहीं होती। किसी भी संदिग्ध कॉल या ठगी की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करने या आधिकारिक पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने की सलाह दी गई है।

