नई दिल्ली : दिल्ली में हुए 2020 के दंगों पर आधारित फिल्म की रिलीज को लेकर घमासान मचा हुआ है। कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने इस फिल्म को लेकर आपत्ति व्यक्त की है। उनका कहना है कि यह फिल्म भारतीय जनता पार्टी की ओर से प्रायोजित है। इस फिल्म के जरिए आने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव में वोटों को प्रभावित करने का भी आरोप लगाया जा रहा है।
राजनीतिक माहौल को बनाया जा रहा सांप्रदायिक
चुनाव से तीन दिन पहले 2 फरवरी को फिल्म रिलीज होने वाली है। अब फिल्म के मद्देनजर वरिष्ठ वकील और कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि फिल्म में लोगों का ध्रुवीकरण करने और एक विशेष समुदाय को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस ने रविवार को चुनाव आयोग से उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगों पर आधारित फिल्म ‘2020 दिल्ली’ की रिलीज को टालने की बात करते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल को सांप्रदायिक बनाने की कोशिश कर रही है।
क्या बीजेपी को अपने चुनाव प्रचार पर भरोसा नहीं हैः सिंघवी
पार्टी ने इस संबंध में चुनाव आयोग को शिकायत की है। सिंघवी ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान सवालिया लहजे में पूछा कि क्या बीजेपी को अपने उम्मीदवारों और चुनाव प्रचार पर भरोसा नहीं है कि उसे समाज को विभाजित करने और मतदाताओं को गुमराह करने के लिए सांप्रदायिक रूप से प्रेरित फिल्मों के प्रचार करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, ‘क्या पार्टियां अब अपने चुनाव अभियान के तहत प्रोपेगेंडा फिल्मों को प्रायोजित करना शुरू कर देंगी?’
दिल्ली चुनाव से दो दिन पहले रिलीज होगी फिल्म
उन्होंने कहा कि बीजेपी नेता सक्रियता से फिल्म का प्रचार कर रहे हैं, जैसे कि उन्हें फिल्म के आधिकारिक प्रमोटर के रूप में काम पर रखा गया है और ट्रेलर को आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर साझा किया है। सिंघवी का कहना है कि फिल्म का ट्रेलर घटनाओं में भेदभावपूर्ण को प्रदर्शित करता है। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि बीजेपी ने राजनीतिक लाभ के लिए एक धार्मिक अल्पसंख्यक को निशाना बनाने का फिर से प्रयास किया है। चुनाव से दो दिन पहले रिलीज के लिए इस तरह की फिल्म का शेड्यूल क्यों और कैसे है?
उकसाने वाली फिल्म है ‘2020 दिल्ली‘
कांग्रेस नेता का कहना है कि ‘जवाब बहुत स्पष्ट है। 2019 में, बीजेपी ने मोदी की बायोपिक की रिलीज़ की योजना बनाते हुए इसी तरह का तरीका अपनाया। हम चुनाव आयोग और फिर सुप्रीम कोर्ट गए। हमारे हस्तक्षेप पर चुनाव आयोग ने आखिरकार बायोपिक की रिलीज टालने का निर्देश जारी किया है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी फिल्म के प्रचार के खिलाफ नहीं है, लेकिन जिस मुद्दे के बारे में वे बात कर रहे हैं वह जानबूझकर चुनी गई संवेदनशील, सांप्रदायिक रूप से उकसाने वाली फिल्म है, जो चुनाव से कुछ दिन पहले रिलीज की जा रही है।
फिल्म के डायरेक्टर और उनके परिवार को मिल रही धमकियां
इस पूरे मामले में फिल्म के डायरेक्टर देवेंद्र मालवीय का कहना है कि उनको और उनके परिवार को इस मामले में धमकाया जा रहा है। उनका कहना है कि उन्हें इस बात का दुख नहीं है कि फिल्म को लेकर चुनाव आयोग से शिकायतें की जा रही है, बल्कि वे इस बात से आहत है कि पीड़ितों के दर्द पर फिल्म बनाना इतना बड़ा गुनाह कैसे हो गया कि पूरा इकोसिस्टम उन पर टूट पड़ा है। उनकी मंशा केवल सच्चाई को सबके सामने लाना है। लेकिन, एक बात उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे डरेंगे नहीं।


