रांची: पूर्वी सिंहभूम जिले के जमशेदपुर में भारी वाहन चालकों के प्रशिक्षण के लिए ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट खुलेगा। राज्य सरकार ने इंस्टिट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेंनिंग एंड रिसर्च (IDTR Tier-I) की स्थापना के लिए 22 करोड़ 3 लाख 31 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी है।
परिवहन विभाग (लीड एजेंसी, सड़क सुरक्षा) ने इस संबंध में संकल्प जारी कर दिया है। इसके अनुसार इस परियोजना में 17 करोड़ रुपये भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से अनुदान के रूप में प्राप्त होंगे। इसके अतिरिक्त 1 करोड़ 82 लाख रुपये टाटा मोटर लिमिटेड जमशेदपुर वहन करेगी, जबकि शेष 3 करोड़ 21 लाख 31 हजार रुपये राज्य सरकार वहन करेगी।
पहली बार उच्च स्तरीय संस्थान की स्थापना होगी
यह परियोजना झारखंड में पहली बार ऐसे उच्चस्तरीय संस्थान की स्थापना करेगी, जहां भारी मोटर वाहन, ट्रांसपोर्ट वाहन और व्यावसायिक चालकों को वैज्ञानिक, मानकीकृत और नियम आधारित प्रशिक्षण दिया जाएगा। वर्तमान में राज्य में इस स्तर का प्रशिक्षण केंद्र नहीं होने के कारण भारी वाहन चालकों को प्रमाणित प्रशिक्षण लेने में कठिनाई होती है और कई बार बिना पर्याप्त प्रशिक्षण के ही चालक वाहन की स्टेयरिंग पकड़ लेते हैं। ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट खुलने से ड्राइवर की भी कमी दूर होगी। वाहन मालिकों को बड़ी राहत मिलेगी।
न्यूनतम 30 दिन का प्रशिक्षण अनिवार्य
केंद्रीय मोटर वाहन नियमावली, 1989 के नियम 3(4) के अनुसार व्यवसायिक वाहन चलाने के लिए चालक अनुज्ञप्ति (ड्राइविंग लाइसेंस) जारी करने से पहले प्रशिक्षु को न्यूनतम 30 दिनों का प्रशिक्षण लेना अनिवार्य है। इसके साथ कम से कम 15 घंटे का व्यावहारिक ड्राइविंग प्रशिक्षण भी आवश्यक है, ताकि चालक को वास्तविक परिस्थितियों में वाहन संचालन का अनुभव मिल सके।
मिलेगा प्रमाण पत्र
नियमावली यह भी स्पष्ट करती है कि भारी मोटर वाहन चालक को निर्धारित न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के साथ किसी प्राधिकृत संस्थान से प्रशिक्षण प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य होगा, तभी भारी वाहन का लाइसेंस निर्गत किया जा सकेगा।
प्रशिक्षण के दौरान चालकों को केवल वाहन संचालन नहीं, बल्कि ड्राइविंग स्किल, ट्रैफिक नियम एवं विनियम, सड़क संकेतों की समझ, वाहन रखरखाव, आपातकालीन स्थिति में प्रतिक्रिया, ब्रेकिंग तकनीक, ईंधन दक्षता और कठिन मार्गों पर नियंत्रण जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाएंगी।
ट्रैफिक रूल्स और रेगुलेशन बताए जाएंगे
झारखंड में बेहतर इंस्टिट्यूट नहीं होने की वजह से राज्य के बाहर के संस्थानों से प्रशिक्षण प्राप्त वाहन चालक भारी वाहन चला रहे हैं। कई के पास अभी कोई सर्टिफिकेट नहीं है। ऐसे बिना प्रशिक्षण प्राप्त किए भारी वाहन चालकों को ड्राइविंग स्किल्स ट्रैफिक रूल्स एंड रेगुलेशन तथा वाहन रखरखाव की पर्याप्त जानकारी नहीं होती।
यही कारण है कि सड़क दुर्घटनाओं से उत्पन्न आपदाओं पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। विशेष रूप से ट्रक, बस और अन्य भारी वाहनों से जुड़ी दुर्घटनाओं में चालक की तकनीकी कमी, थकान प्रबंधन का अभाव, गलत ब्रेकिंग और ट्रैफिक अनुशासन की अनदेखी बड़ी वजह बनती है।ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट के आधुनिक प्रशिक्षण व्यवस्था के तहत कठिन परिस्थितियों जैसे रात में ड्राइविंग, बारिश, धुंध, ओवरलोड स्थिति और अचानक ब्रेकिंग का भी अभ्यास कराया जा सकेगा, जिससे चालक वास्तविक परिस्थितियों में बेहतर निर्णय ले सकेंगे।
इस मौजा के 12 एकड़ में बनेगा इंस्टीट्यूट
इस परियोजना की शुरुआत पहले काशीडीह, जमशेदपुर में की गई थी और वर्ष 2019 में निर्माण कार्य भी प्रारंभ हुआ था, लेकिन स्थानीय विरोध और विधि-व्यवस्था की समस्या के कारण कार्य रुक गया। बाद में पूर्वी सिंहभूम प्रशासन ने मौजा मनपीठा में 11.88 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई, जहां अब संस्थान का निर्माण प्रस्तावित है। बता दे कि संशोधित डीपीआर को भारत सरकार ने 21 मार्च 2025 को स्वीकृति दी थी।
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