जमशेदपुर : निजी स्कूलों से जुड़े अहम मुद्दों को लेकर शुक्रवार को एसोसिएशन ऑफ झारखंड अनएडेड प्राइवेट एजुकेशन इंस्टिट्यूशंस और निजी स्कूल प्रबंधन की बैठक नर्भेराम हंसराज इंग्लिश स्कूल, बिष्टुपुर में आयोजित की गई। बैठक के बाद एसोसिएशन की ओर से प्रेस वार्ता कर लिए गए निर्णयों की जानकारी दी गई। प्रेस वार्ता में टाटा लीज एरिया के अंतर्गत कमजोर एवं अभिवंचित वर्ग (आरक्षित वर्ग) के बच्चों के नामांकन, बकाया फीस और फीस बढ़ोतरी जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
एसोसिएशन के चेयरमैन नकुल कमानी ने कहा कि निजी स्कूल अब आरक्षित वर्ग के बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने की स्थिति में नहीं हैं। सरकार द्वारा निर्धारित 425 रुपये की राशि को उन्होंने पूरी तरह अव्यावहारिक बताया। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए स्कूलों को कम से कम सम्मानजनक राशि की आवश्यकता है। वर्षों से बकाया भुगतान नहीं होने के कारण स्कूलों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई है।
सचिव डॉ. श्रीकांत नायर ने बताया कि बकाया राशि के भुगतान और आरक्षित वर्ग के बच्चों की फीस में बढ़ोतरी की मांग को लेकर निजी स्कूल एसोसिएशन अब सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगा। कोर्ट से स्थगन आदेश मिलने के बाद नए शैक्षणिक सत्र में आरक्षित वर्ग के बच्चों का नामांकन भी नहीं लिया जाएगा।
प्रेस वार्ता में यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि सरकार ने आरक्षित वर्ग के बच्चों की फीस भुगतान को लेकर कोई समाधान नहीं निकाला, तो इसका सीधा असर सामान्य श्रेणी के लगभग 75 प्रतिशत अभिभावकों पर पड़ेगा। निजी स्कूलों ने संकेत दिए हैं कि ऐसी स्थिति में ट्यूशन फीस और अन्य शुल्कों में कम से कम 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की जा सकती है।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सवाल उठाया कि जब आरक्षित वर्ग के बच्चों की फीस का 60 प्रतिशत केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करती है, तो राज्य सरकार सम्मानजनक राशि तय क्यों नहीं कर रही है। उन्होंने बताया कि यह मांग एसोसिएशन पिछले दस वर्षों से लगातार उठाता आ रहा है। प्रेस वार्ता में उपाध्यक्ष ज्ञान तनेजा, शरत चंद्रन, कोषाध्यक्ष आर.के. झुनझुनवाला, सदस्य शशि झटकिया और राजीव तलवार सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।
नियम पालन नहीं तो होगी कार्रवाई
निजी स्कूल एसोसिएशन के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए जिला शिक्षा अधीक्षक आशीष कुमार पांडे ने कहा कि सभी निजी स्कूलों को सरकार के नियम-कानून के अनुसार ही संचालन करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि स्कूल कोर्ट जाना चाहते हैं तो वे इसके लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन शिक्षा विभाग को सरकार के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है।
डीएसई ने कहा कि टाटा लीज एरिया के अंतर्गत संचालित स्कूल सरकार के अनुदान प्राप्त श्रेणी में आते हैं, इसी कारण आरक्षित वर्ग के बच्चों की फीस का भुगतान नहीं किया जा रहा है। वहीं, टाटा लीज एरिया के बाहर स्थित निजी स्कूलों में पढ़ रहे आरक्षित वर्ग के बच्चों की फीस नियमानुसार दी जा रही है।
उन्होंने चेतावनी दी कि आरटीई एक्ट के प्रावधानों का पालन नहीं करने वाले स्कूलों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि निजी स्कूल अपनी मर्जी से फीस में बढ़ोतरी नहीं कर सकते। इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत सरकार से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
- टाटा लीज एरिया में कुल 40 स्कूल
- पांच वर्षो में कुल 10 करोड़ बकाया
- वर्तमान में निर्धारित राशि प्रति माह प्रति बच्चा 425
- निजी स्कूल कर रहे कम से कम 1000 रुपया प्रति बच्चा की मांग
- राज्य सरकार द्वारा निर्धारित फीस का 60 प्रतिशत हिस्सा देती है केंद्र
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