जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिले के प्राथमिक और मध्य विद्यालयों काे विद्यालय विकास निधि नहीं मिलने से विद्यालय संचालन व्यवस्था प्रभावित हो रही है। सरकार जहां स्कूली शिक्षा को बेहतर बनाने का दावा कर रही है, वहीं चालू वित्तीय वर्ष में अब तक निधि जारी नहीं होने से विद्यालयों की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं हो पा रही है। आवश्यक सामग्री की खरीदारी बाधित होने के कारण शिक्षकों को अपनी जेब से खर्च करना पड़ रहा है।

शिक्षक संघों का कहना है कि पहले से ही मिलने वाली राशि साल भर के खर्च के लिए अपर्याप्त होती है, ऊपर से भुगतान में देरी से समस्याएं और बढ़ गई हैं। निधि के अभाव में बाल पंजी, कैश बुक, छात्र-शिक्षक उपस्थिति पंजी, मीटिंग बुक और एमडीएम दैनिक पंजी जैसी आवश्यक सामग्री की खरीद प्रभावित हो रही है। कई विद्यालयों के प्रधानाध्यापक अपने पारिवारिक खर्च में कटौती कर विद्यालय की दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए मजबूर हैं। वहीं अधिकारियों का कहना है कि शिक्षक अपने वेतन से सामग्री की खरीद करें जब आवंटन आएगा तो जो भी राशि खर्च होगी उसमें से शिक्षकों को भुगतान कर दिया जाएगा।
ये है विद्यालय विकास निधि की व्यवस्था
- छात्र संख्या: मिलने वाला आवंटन
- 100 छात्र पर: 25,000
- 100 से 250 छात्र पर: 50000
- 250 से 500 छात्र पर: 75000
- 500 से 1000 छात्र पर: 100000
यह काम हो रहा प्रभावित
31 मार्च को इस शैक्षणिक सत्र का समापन हो जाएगा लेकिन अब तक यह राशि विद्यालयों को उपलब्ध नहीं हो पाई है। शिक्षकों की परेशानी बढ़ गई है लेकिन शिक्षा विभाग के उच्च पदस्थ बेफिक्र हैं। बड़ी संख्या वाले विद्यालयों का उदाहरण लें तो तीन माह के लिए चौक-खल्ली का खर्च 1100 रुपये, शौचालय, यूरिनल व टंकी की साफ सफाई मद में 12,000 से 13,000 रुपये, रंग-रोगन में कम से कम 50,000 रुपये, रजिस्टर और पंजी की खरीदारी में 5500 रुपये स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर मिठाई मद में कम से कम 10,000 रुपये का खर्च आता है।
पूरा वित्तीय वर्ष समाप्त होने को है, लेकिन अब तक विद्यालयों को विकास अनुदान की राशि नहीं मिली है, जिससे स्कूलों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। साफ-सफाई के लिए झाड़ू, साबुन, सर्फ और चॉक तक खरीदने के पैसे नहीं हैं। कई जगह शिक्षक अपने खर्च से सामग्री खरीद रहे हैं। विभाग भुगतान का आश्वासन दे रहा है, लेकिन शिक्षक शीघ्र राशि जारी करने की मांग कर रहे हैं।
-अरूण सिंह, अध्यक्ष झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ”

