जमशेदपुर : जमशेदपुर के परसुडीह के रहने वाले विश्वदीप जीस्त बालीवुड में चमके हैं। उन्होंने एआर रहमान की फिल्म “गांधी टॉक्स” के लिए गीत लिखा है। फिल्म में विश्वदीप के द्वारा लिखी गई “निंदिया परी” समेत कुल तीन गीत इस फिल्म में शामिल हैं। विश्वदीप साल 2013 में बालीवुड में अपनी किस्मत आजमाने गए थे। उन्हें काफी संघर्ष के बाद सफलता मिली है। इस कामयाबी पर उनका परिवार काफी खुश है।
रिलीज हो चुके हैं 20 से अधिक गीत
जमशेदपुर के परसुडीह की गलियों में पले-बढ़े विश्वदीप ने करीम सिटी कॉलेज से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई कर अपने सपनों को पूरा करने के लिए 2013 में मायानगरी का रुख कर लिया था। बिना किसी गॉडफादर के विश्वदीप ‘ज़ीस्त’ ने एक दशक से ज्यादा समय तक मुंबई में लगातार संघर्ष किया। इस दौरान उन्होंने खामोशी, वो भी दिन थे और दंगे आदि फिल्मों में गीत लिखे। अब तक उनके लिखे 20 से ज्यादा फिल्मी और गैर फिल्मी गीत रिलीज हो चुके हैं।
काम के दौरान एआर रहमान से मिली शाबाशी
विश्वदीप बताते हैं कि एआर रहमान के लिए काम करना, ऐसे सपने के सच होने जैसा है, जो उन्होंने देखने की भी हिम्मत नहीं की थी। गांधी टॉक्स में शामिल ‘निंदिया परी’ एक लोरी है, जिसे एक पिता अपनी बेटी के लिए गाता है। इसे रहमान साहब ने पसंद किया और उसे फिल्म का हिस्सा बनाया। म्यूजिक लॉन्च के दौरान एआर रहमान से मिली शाबाशी ने उनके वर्षों के संघर्ष को सार्थक बना दिया है।
दृढ़ निश्चय के दम पर बॉलीवुड में गाड़े झंडे
अपनी सफलता के बारे में बताते हुए विश्वदीप भावुक हो जाते हैं, और कहते हैं कि 2013 को जब वो गीतकार बनने का सपना लिए मुम्बई आने की योजना बना रहे थे, तब कई लोगों ने उन्हें हतोत्साहित किया, हौसला तोड़ा, लेकिन उन्हें अपनी प्रतिभा पर पूरा भरोसा था और इसी प्रतिभा और दृढ़ निश्चय के दम पर उन्होंने बॉलीवुड में अपने झंडे गाड़े।
13 साल की उम्र में शुरू कर दी थी शायरी
वर्षों के संघर्ष के बाद मिली यह खुशी अनमोल है। विश्वदीप बताते हैं कि संगीत और किताबें उनके घर की संस्कृति का अहम हिस्सा थे। बचपन में एक दिन जब उन्हें पता चला कि स्वर कोकिला लता मंगेशकर द्वारा गाया गया एक बंगाली गीत उनके पिता मनोज कांति सेन द्वारा लिखा गया है, जिसका क्रेडिट उन्हें कभी नहीं मिला, तो इस घटना ने भी उन्हें लेखन में आने को प्रेरित किया। लगभग 13 साल की उम्र में उन्होंने शायरी करनी शुरू कर दी, और वो सिलसिला निरंतर जारी रहा।
साजिद अली की फिल्म से हुई थी शुरुआत
बहुचर्चित फिल्म ‘गांधी टॉक्स’ में शामिल ‘निंदिया परी’ गीत जमशेदपुर के विश्वदीप ‘ज़ीस्त’ की अब तक की सबसे बड़े उपलब्धि है। गीतकार के रूप में उनके फ़िल्मी सफर की शुरुआत साजिद अली की फिल्म ‘वो भी दिन थे’ से हुई, जिसमें उन्होंने जॉय बरुआ के संगीत निर्देशन में ‘मुझको मिली’ नामक गीत लिखा। इसके बाद उन्होंने समीर टंडन के साथ फिल्म ‘खामोशी’ के लिए शीर्षक गीत लिखा, जिसे श्रुति हासन ने अपनी आवाज दी थी. आगे चलकर उन्होंने बिजॉय नाम्बियार निर्देशित फ़िल्म ‘दंगे’ का गीत ‘ये पल हैं अपने’ भी लिखा। उनके लिखे गीतों को हरिहरन, अलका याग्निक, मोहित चौहान, पापोन, मोनाली ठाकुर, नीति मोहन, जोनिता गांधी, कुणाल गांजावाला, श्रुति हासन आदि दिग्गज गायकों ने भी अपनी आवाज़ दी है।
शहीद दिवस पर रिलीज हुई थी ‘गांधी टॉक्स’
महात्मा गांधी के सत्य-अहिंसा के संदेश दुनिया भर के सबसे प्रभावी सिद्धांतों में से एक है, वही भारतीय जनजीवन में गांधीजी इतने रचे बसे हैं, कि राष्ट्रपिता गांधी की तस्वीर हर भारतीय करेंसी पर छपी होती है। आर्थिक जरूरतें जहां इंसानों को क्या कुछ करने को मजबूर नहीं करतीं, वहीं अंत में सत्य की राह पर चलने वाले व्यक्ति और परिवार की ही जीत होती है। डायरेक्टर किशोर पांडुरंग बेलेकर निर्देशित साइलेंट फिल्म “गांधी टॉक्स” शहीद दिवस को भारत के सिनेमाघरों में रिलीज हुई, जो हमें अपने जीवन से जुड़े मानवीय मूल्यों के प्रति गहराई से सोचने को प्रेरित करती है। साइलेंट फिल्म “गांधी टॉक्स” में कोई संवाद नहीं है, वहीं समय-समय पर पृष्ठभूमि में चलने वाले भावनात्मक गीत दर्शकों को कहानी में स्वयं का जुड़ाव महसूस करवाते हैं। सिनेमा में संगीत ऑस्कर विजेता एआर रहमान ने दिया है।
फिल्मों के साथ साथ विश्वदीप ज़ीस्त’ साहित्य की दुनिया में भी काफी सक्रिय हैं और मुम्बई, नवी मुम्बई, पुणे, सूरत, जमशेदपुर आदि शहरों के ढेरों कवि सम्मेलनों और मुशायरों में हिस्सा ले चुके हैं।
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